नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग
आदिवासी संस्कृति की जीवंतता का प्रतीक है जतरा मेला: मुन्ना सिंह
कटकमसांडी/हजारीबाग: सदर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह बुधवार को कटकमसांडी प्रखंड के डिबल बांध, शाहपुर में आयोजित सरना समिति आदिवासी कुटुम्ब जतरा मेला में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने आदिवासी संस्कृति, अस्मिता और सामुदायिक एकता के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही मुन्ना सिंह का स्वागत पारंपरिक ढोल-मांदर की गूंज, नृत्य और आदिवासी गीतों के साथ सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप तिलक और फूल लगाकर किया गया।
“जतरा मेला, अस्मिता का जीवंत प्रतीक”
मंच से उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुन्ना सिंह ने कहा कि “यह जतरा मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक है।” उन्होंने जोर दिया कि समाज की सबसे बड़ी पूंजी हमारी संस्कृति, परंपरा और एकता है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है।
मुन्ना सिंह ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही आदिवासी समाज की आवाज रही है, और इसने आदिवासी समुदायों के अधिकार, सम्मान और अस्तित्व की रक्षा के लिए देशभर में ऐतिहासिक संघर्ष किया है। उन्होंने आदिवासी समाज को इस देश की आत्मा बताते हुए कहा, “जब तक मांदर की थाप और प्राकृतिक प्रेम है, भारत की आत्मा अमर है।”
सांस्कृतिक कार्यक्रम और एकता का आह्वान
मेले में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएँ, युवा और विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया। पूरा वातावरण ‘जय जोहार’ के नारों और ढोल-मांदर की थापों से गुंजायमान रहा। स्थानीय कलाकारों ने मनमोहक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए।
मुन्ना सिंह ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है।”
कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने सभी ग्रामीणों से एकजुट होकर समाज और संस्कृति की रक्षा का आह्वान किया और कहा कि आदिवासी समाज की एकता ही उसके अस्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति है।