टीकमगढ़: सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करना पड़ा किसान को महंगा, रेंजर ने दी जूते से मारने और केस दर्ज करने की धमकी
दित्यपाल राजपूत
टीकमगढ़। जिले के जतारा वन परिक्षेत्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक किसान को अपनी समस्या सरकार के सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज कराना महंगा पड़ गया। मामला भटगोरा गांव का है, जहां किसान अखिलेश पाल ने वन विभाग की जमीन पर दबंगों द्वारा किए गए अतिक्रमण की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई थी। शिकायत का उद्देश्य था कि वन भूमि से दबंगों का कब्जा हटाया जाए और न्यायपूर्ण कार्रवाई हो। लेकिन विभागीय लापरवाही और अधिकारियों की मनमानी के चलते किसान को अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ा।
किसान अखिलेश पाल के अनुसार, वन विभाग गरीब किसानों के खिलाफ तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है, लेकिन प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जाई गई जमीनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने यह शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज की, तो बिना किसी मौके के निरीक्षण या समस्या के समाधान के ही विभाग ने पोर्टल पर मामला “निराकृत” यानी सुलझा हुआ बता दिया।
जब अखिलेश पाल को इस बात का पता चला, तो उन्होंने जतारा के रेंजर शिशुपाल अहिरवार से फोन पर संपर्क किया और पूछा कि बिना निरीक्षण के समस्या का समाधान कैसे बता दिया गया। इस पर रेंजर कथित रूप से भड़क गए और किसान से अभद्र भाषा में बात करते हुए उसे जूते से मारने की धमकी दे डाली। रेंजर ने कहा, “मेरे सामने आएगा तो जूते से मारूंगा, मैं तेरा नौकर नहीं हूं।” इतना ही नहीं, उन्होंने किसान को शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज करने की भी धमकी दी।
किसान ने इस पूरी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर ली है, जो अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। रिकॉर्डिंग में रेंजर की अपमानजनक बातें स्पष्ट सुनी जा सकती हैं। किसान अखिलेश पाल ने कहा कि वह केवल न्याय की उम्मीद में शिकायत कर रहे थे, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों के रवैये ने उन्हें हैरान कर दिया।
मामले की शिकायत अब वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गई है। किसान ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित रेंजर के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारी अक्सर गरीब किसानों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं, जबकि प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाता। इस संबंध में रेंजर द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया डीएफओ का कहना है कि मामले को संज्ञान में लिया गया है
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान वर्ग का कहना है कि यदि सीएम हेल्पलाइन जैसी जनकल्याणकारी व्यवस्था में भी सत्य बोलने पर धमकियां मिलेंगी, तो आम जनता अपनी समस्या कहां लेकर जाएगी। इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता हूं