भोपाल, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने कहा कि भाजपा को हमेशा “शहरों की पार्टी” कहा गया, लेकिन बीते दो दशकों के शासनकाल में भाजपा ने शहरों को विकास के बजाय अराजकता, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि भाजपा को शहरों से सबसे अधिक राजनीतिक समर्थन मिला, लेकिन उसने उस भरोसे के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात किया। भाजपा ने न तो कोई ठोस शहरी नीति दी और न ही भविष्य की चुनौतियों के लिए शहरों को तैयार किया। आज हालत यह है कि मध्य प्रदेश के शहर अवैध कॉलोनियों, जाम, सीवेज संकट और बेतरतीब निर्माणों के जाल में फँस चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा का शहरी मॉडल केवल राजनीतिक परसेप्शन की मार्केटिंग पर टिका है — विकास के नाम पर झूठे नारे, विज्ञापन और फोटोशूट चल रहे हैं, जबकि जमीन पर शहरों की रीढ़ टूट चुकी है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार की शहरी योजनाओं की सच्चाई ओवरब्रिज और सड़कों की दरकती कंक्रीट में दिखाई देती है।
जबलपुर में हजार करोड़ की लागत से बना ओवरब्रिज उद्घाटन के कुछ महीनों में ही दरारों से भर गया।
कटनी में दस करोड़ की सड़क छह महीने में ही उखड़ गई।
भोपाल में रेलवे ब्रिज का हिस्सा धंस गया और सड़कों में 20 फीट गहरे गड्ढे बन गए।
जीजी फ्लाई ओवर अपने घटिया निर्माण की कहानी राजधानी में रो रोकर सुना रहा है।
वहीं भोपाल का 90 डिग्री फ्लाईओवर मोड़ भाजपा के “इंजीनियरिंग चमत्कार” की राष्ट्रीय स्तर पर हँसी का कारण बना।
उन्होंने कहा कि यह सब भाजपा शासन के उस चरित्र को उजागर करता है जिसमें ठेकेदारों, अधिकारियों और सत्ताधारियों की मिलीभगत ने भ्रष्टाचार को ही नीति बना दिया है। हर निर्माण में कमीशनखोरी, हर योजना में अपारदर्शिता और हर सड़क में दरार — यही भाजपा की “स्मार्ट सिटी” की हकीकत है। भारी कमीशन और अनियंत्रित भ्रष्टाचार की कहानी बन चुकी स्मार्ट सिटी योजना को भाजपा ने बहुत शर्मिन्दा होकर वापस लिया है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि भाजपा के शासन में शहरों का संतुलित विकास नहीं, बल्कि अनियंत्रित विस्तार हुआ है, जिसने नागरिक जीवन को कठिन बना दिया है।
न कोई सुव्यवस्थित यातायात, न सीवेज की समुचित व्यवस्था, न हरियाली का संरक्षण — हर दिशा में सिर्फ अव्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि आज मध्य प्रदेश के शहर भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह अप्रस्तुत हैं, क्योंकि भाजपा ने विकास नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रचार की बुनियाद पर शासन खड़ा किया है। परिणामस्वरूप आज शहरों में योजनाबद्ध विकास की जगह अराजकता का कब्जा है।
डॉ. विक्रम चौधरी ने कहा कि भाजपा ने शहरों के वोट बैंक को तो साध लिया, लेकिन शहरों की आत्मा — उनकी स्वच्छता, योजना और संरचना — सबको भ्रष्टाचार और लापरवाही के हवाले कर दिया। भाजपा का शहरी विकास मॉडल अब पूरी तरह ढह चुका मॉडल है।