नन्दगोपाल पाण्डेय ब्यूरोचीफ सोनभद्र
भारतीय लोकतंत में सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि जिस वर्ग ने इस देश को सबसे अधिक टैक्स से लेकर देश सेवा तक, विज्ञान से लेकर सेना तक,शिक्षा से लेकर प्रशासन तक उसी सामान्य वर्ग की पीड़ा अनसुनी रही ।दशकों से एक वर्ग विशेष को सिर्फ इसलिए नजर अंदाज किया गया क्यों कि उसके पास ना कोई वोट बैंक था ना कोई आरक्षण ना ही कोई राजनीतिक दल उसकी बात करने को तैयार था। लेकिन अब यह चुप्पी टूटी है अब सामान्य वर्ग गुमनाम नहीं,बल्कि संगठित हो चुका है सामान्य वर्ग में नई चेतना लाने का काम कर रहा है राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत जिसका नेतृत्व कर रहे हैं वैचारिक साथी गण , राष्ट्रीय अध्यक्ष है सूरज प्रसाद चौबे
राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत का गठन किसी जातीय द्वेष के कारण नहीं हुआ है बल्कि उस लम्बे अन्याय के विरुद्ध प्रतिक्रिया है जिसे सामान्य वर्ग के युवाओं,बेरोजगारों,विद्यार्थियों ,प्रोफेशनलों और गृहिणियों ने दशकों तक चुप चाप सहा है
राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत तीन प्रमुख लक्ष्यों को लेकर काम कर रही है 1 सामान्य वर्ग के संवैधानिक अधिकार की रक्षा 2बेरोजगार युवाओं के लिए सार्थक एवं स्थाई रोजगार की व्यवस्था 3 संवैधानिक सवर्ण आयोग की स्थापना सिर्फ आरक्षण एवं अधिकारी की बात करना पर्याप्त नहीं है देश में वोट बैंक के लिए बनाए गए एससीएसटी एक्ट,एव अन्य जातिगत भेदभाव को समाप्त करना राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत का प्रमुख उद्देश्य है,सभी समस्याओं से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान,नीतिगत बदलाव की मांग को लेकर सक्रिय है जहां राजनीतिक दल युवाओं को वोट बैंक के रूप में देख रहे हैं वहीं राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत युवाओं को समाज एवं राष्ट का स्तम्भ मानती है बेरोज़गारी हटाओ अभियान, योग्यता आधारित भर्ती की वकालत,सककारी नौकरियों में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत लड़ाई लड़ने को तैयार है आह राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत एक संगठन ही नहीं एक विचार धारा बन चुका है उत्तर प्रदेश ही नहीं राजस्थान मध्यप्रदेश,बिहार झारखंड, छत्तीसगढ़ से भी लोग जुड़ चुके हैं उक्त बातें राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरज प्रसाद चौबे ने कहा साथ ही कहा कि अब सामान्य वर्ग नहीं रहेगा मौन