सिवनी बालाघाट सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन चाहें तो कंपनी सिवनी में बना सकती हैं कार्यालय,जिससे कम से कम दो सौ लोगों को रोजगार मिल सकता है सिवनी सहित ढाई दर्जन जिलों को मिलाकर छः जियोग्राफिकल एरिया बनाए जाने के बाद अब सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा एवं बैतूल जिलों में पीएनजी रसोई गैस की आपूर्ति कहां से की जाएगी इस बारे में भी रोड मेप तैयार किया जा रहा है। सिवनी में नागपुर से गैस लाकर सप्लाई कराने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।नई दिल्ली के बाबर रोड स्थित पेट्रोलियम एण्ड नेचरल गैस रेगुलेटरी बार्ड (पीएनजीआरबी) के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मुंबई से नागपुर तक डलने वाली एमएनपीएल पाईप लाईन 24 इंच के डायमीटर वाले पाईप में नागपुर तक लाई जाएगी।
जानकारों ने आगे बताया कि इसके बाद नागपुर से छिंदवाड़ा और सिवनी समान दूरी होने के बावजूद भी सिवनी के बजाए नागपुर तक पाईप लाईन बिछाने का प्रस्ताव पीएनजीआरबी के पास है। इस प्रस्ताव को छिंदवाड़ा के स्थान पर सिवनी करने के लिए ठेकेदार खुद ही स्वतंत्र होगा कि वह नागपुर से पाईप लाईन के जरिए गैस कहां तक ले जाए और अपना प्लांट कहां स्थापित करे।
सूत्रों ने चर्चा के दौरान इस बात के संकेत भी दिए कि यह केंद्र का मामला है और सबसे पहले पाईप लाईन बैतूल, छिंदवाड़ा एवं बालाघाट संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिला मुख्यालयों में डाली जाना है अतः इन चारों जिलों के सांसद क्रमशः दुर्गा दास उईके, नकुल नाथ एवं डॉ. ढाल सिंह बिसेन पर निर्भर करता है कि कौन इसमें बाजी मारकर अपने संसदीय क्षेत्र में इसका कार्यालय खुलवा पाते हैं और प्लांट लगवा पाते हैं।
सूत्रों ने बताया कि कंपनी को जिला मुख्यालय में कार्यालय खोलना और स्टोरेज प्लांट लगाना सुगम ही साबित हो सकता है क्योंकि सिवनी से बालाघाट और छिंदवाड़ा की दूरी कमोबेश समान ही है। इसके अलावा बैतूल को भी सिवनी से ही कव्हर किया जा सकता है, किन्तु सिवनी में ब्राडगेज न होना और फोरलेन का जर्जर होना एक समस्या के रूप में सामने आ सकता है, जिसके कारण जिस भी कंपनी को ठेका मिलता है वह अपना कार्यालय और स्टोरेज प्लांट छिंदवाड़ा में लगा सकती है।
डॉ. बिसेन चाहें तो दो सौ से ज्यादा युवाओं को मिल सकता है रोजगार।
सूत्रों ने यह भी बताया कि जिस भी कंपनी को पीएनजी पाईप लाईन डालने और रसोई गैस प्रदाय का ठेका मिलेगा, वह आने वाले 25 सालों के लिए होगा। कंपनी जहां भी अपना कार्यालय और स्टोरेज प्लांट लगाएगी वहां के कम से कम दो सौ से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलना तय है, क्योंकि कुछ स्किल्ड वर्कस और अधिकारी तो कंपनी अपने लाएगी पर बाकी स्थानीय स्तर पर ही लगाए जाएंगे।
कम से कम दो एकड़ भूखण्ड की की जरूरत पड़ेगी सूत्रों ने बताया कि कंपनी के द्वारा अगर सिवनी में कार्यालय खोला जाता है और स्टोरेज प्लांट लगाया जाता है तो यहां कम से कम दो एकड़ भूखण्ड की जरूरत कंपनी को होगी। पहले तो कंपनी के द्वारा सरकारी स्तर पर भूखण्ड तलाशे जाएंगे, अगर नहीं मिलते हैं तो निजि तौर पर भूखण्ड क्रय किए जाएंगे,आगे इसके अलावा कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए शहर में आवास भी कंपनी के द्वारा किराए से लिए जाएंगे। कुल मिलाकर अगर बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन के द्वारा इसके लिए ईमानदारी से प्रयास किए जाते हैं तो सिवनी के बाजार में हर माह कर्मचारियों, अधिकारियों को मिलने वाले वेतन की काफी मात्रा में राशि फ्लोट हो सकती है।
केंद्र में भाजपा सरकार इसलिए सिवनी को बना सकते हैं केंद्र!
सूत्रों ने यह भी कहा कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, इस लिहाज से अगर बालाघाट के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन के द्वारा केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एवं पेट्रोलियम एण्ड नेचरल गैस रेगुलेटरी बार्ड (पीएनजीआरबी) के अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है तो दशकों से रोजगार को तरस रहे सिवनी जिले के युवाओं के लिए रोजगार के मार्ग कुछ स्तर तक प्रशस्त हो सकते हैं।

इस मामले में अगर किसी के द्वारा कोई प्रयास नहीं किया जाता है अथवा प्रभावी तरीके से सिवनी का पक्ष नहीं रखा जाता है तो जिस भी कंपनी को पीएनजी का ठेका मिलेगा उसका मुख्यालय छिंदवाड़ा में खुलना तय ही है।
पेट्रोलियम एण्ड नेचरल गैस रेगुलेटरी बार्ड (पीएनजीआरबी) के कुछ सालों पहले बालाघाट के एक पूर्व सांसद के द्वारा बालाघाट को इस योजना में शामिल करने के लिए मौखिक तौर पर अधिकारियों से चर्चा की थी। चूंकि छिंदवाड़ा और बालाघाट जिले को इसमें शामिल करने की कवायद शुरूआती दौर में आरंभ हो चुकी थी इसलिए इन दोनों जिलों के मध्य में स्थित सिवनी जिले को अपने आप ही इसमें शामिल कर लिया गया है।
जिला-सिवनी ब्यूरो चीफ
अनिल दिनेशवर