नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग।
कुडमी को ST सूची में शामिल करने के विरोध में हजारीबाग में ‘उलगुलान जन आक्रोश रैली’
आदिवासी समाज ने डीसी को सौंपा ज्ञापन; बोले- ‘गलत प्रयास का हर हाल में होगा विरोध’
हजारीबाग। कुडमी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग के प्रबल विरोध में सोमवार को हजारीबाग का सरहुल मैदान ‘उलगुलान जन आक्रोश रैली’ का केंद्र बन गया। आदिवासी केंद्रीय सरना समिति की अगुवाई में आयोजित इस महारैली में हजारीबाग सहित रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह और रांची जिलों से हजारों की संख्या में आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ शामिल हुए, जो आदिवासी समाज की एकजुटता का प्रमाण था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक ने की। रैली का संचालन कार्यकारी अध्यक्ष मनोज टुडू के साथ विक्की कुमार धान, पवन तिग्गा, मनोज भोक्ता, विजय भोक्ता, सहदेव किस्कू और फुलवा कच्छप ने संयुक्त रूप से किया।
सुबह से ही सरहुल मैदान में जुटी भीड़ ने निर्धारित मार्ग पर विशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस पंच मंदिर, झंडा चौक, इंद्रपुरी चौक, जिला चौक, बिरसा मुंडा चौक और सिद्ध-कानू चौक होते हुए पुनः सरहुल मैदान लौटा।
सभा में वक्ताओं ने कुडमी समुदाय की एसटी मांग को ‘राजनीतिक प्रयास’ और ‘अवसरवाद’ करार देते हुए पुरजोर विरोध दर्ज कराया: विक्की कुमार धान (सचिव सह मीडिया प्रभारी): “यह मांग आदिवासी समाज के एकता और अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है, जबकि आदिवासी समाज अब जागरूक हो चुका है और किसी भी गलत प्रयास का विरोध करेगा।” ज्योत्स्ना केरकेट्टा: उन्होंने मांग को अवसरवाद से जोड़ते हुए कहा कि जहां लाभ दिखाई देता है, समुदाय उसी दिशा में मुड़ जाता है। निशा भगत (केंद्रीय महिला अध्यक्ष): “हमारी आवाज़ कोई दबा नहीं सकता। हक-अधिकार की लड़ाई निरंतर जारी रहेगी।” शशि पन्ना: उन्होंने दावा किया कि संविधान के विभिन्न विभागों ने पहले भी इस मांग को खारिज किया है, और इतिहास में भी आदिवासी व कुर्मी समुदायों में समानता नहीं पाई जाती। फुलचंद तुर्की “कुडमी और कुर्मी एक ही समुदाय हैं। कुर्मी समाज के लोग ‘कुडमी’ नाम देकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। संजय तिर्की (महासचिव): उन्होंने जनसैलाब को आदिवासी समाज की एकजुटता का प्रमाण बताया।
इस विशाल रैली की तैयारी 2 नवंबर और 9 नवंबर, 2025 को सरहुल मैदान स्थित धूम कुड़िया भवन में हुई दो महत्वपूर्ण बैठकों में पूरी कर ली गई थी। इन बैठकों में 16 प्रखंडों के प्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि और पाहान शामिल हुए थे, जहां सर्वसम्मति से 17 नवंबर को जन आक्रोश महारैली करने का निर्णय लिया गया था।
रैली और सभा के शांतिपूर्वक संपन्न होने के बाद, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने पैदल मार्च करते हुए डीसी कार्यालय पहुँचकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कुडमी समुदाय को एसटी सूची में शामिल न करने की मांग की गई है। उपस्थित संगठनों ने आगे भी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज़ उठाने का संकल्प दोहराया।