कैमोर।नगर क्षेत्र में नल-जल योजना के अंतर्गत पाइप लाइन बिछाने के बाद सड़क निर्माण के नाम पर अलग से डामरीकरण कराया गया। लेकिन यह डामरीकरण नहीं बल्कि सरकारी पैसों की खुली लूट साबित हो रहा है। महज दो दिनों में ही नई बनी सड़क से डामर और गिट्टी उखड़ने लगे हैं और कई स्थानों पर सड़क धंस चुकी है जिसकी वजह से माल वाहक वाहनों सहित स्कूली बच्चों को लाने ले जाने वाले वाहन भी इस सड़क में फंसे दिखाई दे रहे है।
इतनी जल्दी सड़क का खराब हो जाना इस बात का साफ सबूत है कि निर्माण कार्य में मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है। सवाल यह उठता है कि क्या यह डामरीकरण कागजों में मजबूत और ज़मीन पर कमजोर था? सड़क की हालत देखकर आमजन में भारी आक्रोश है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार ने घटिया सामग्री का उपयोग कर खानापूर्ति कर दी और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे रहे। हर साल विकास के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, लेकिन नतीजा वही—टूटी सड़कें और परेशान जनता।
अब जनता यह पूछ रही है कि क्या इस भ्रष्ट ठेकेदार पर कोई सख्त कार्रवाई होगी या फिर हमेशा की तरह मामले को दबा दिया जाएगा? क्या दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, या फिर सरकारी योजनाएं यूं ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेंगी?
कैमोर की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जांच, कार्रवाई और गुणवत्तापूर्ण सड़क की मांग कर रही है। वरना आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन भी बन सकता है।
इंडियन टीवी न्यूज़ कैमोर से श्याम गुप्ता की रिपोर्ट