कांकेर कोटलभट्टी का यह विश्राम भवन ब्यूरो चीफ -राकेश मित्र , जिला -कांकेर “कब का है यह आप खुद देख रहें हैं अंग्रेज जमाने का यह वन विभाग का विश्राम भवन में पहले तो विधुत कनेक्शन तक नहीं था जब कुछ पत्रकारों का दल स्व.रवि श्रीवास्तव के नेतृत्व में कभी यहां गया था तो ” लालटेन और मोमबत्ती “की रोशनी में रात काटी थी” पर मजा आ गया था “जिले के Narharpur ब्लाक कें दुधावा डैम से लगा हुआ यह कोटलभट्टी गांव काफी पुराना है और इसी गांव के आसपास से ही Bharatmala गुजर रही है और इसी कोटलभट्टी के पास एक और गांव है बासनवाही जहां एक दिन का कलेक्टर का निवास है जो जबरदस्त किसान के साथ Social media में विभिन्न मुद्दों को लेकर मुखर होकर बोलने व लिखने वाला छोटा भाई ” Sandeep Diwedi” है रास्ते की बात कही जायें तो हालत पतली है देख – रेख के अभाव में या फिर कहें Bharatmala के चक्कर में अंग्रेजी भाषा का ज़िक्र कहीं नहीं है लेकिन अंग्रेज़ जमाने का विश्राम भवन है क्योंकि पहले कुछ लोगों ने बताया की उत्तर बस्तर को दक्षिण बस्तर से जोड़ने वाली सड़क या फिर कहें खुफिया रास्ता यही था जो उड़ीसा प्रांत को भी टच करता था उस वक्त “इसलिए इस भवन में बिजली नहीं थी लेकिन शायद 2016-17 के आसपास बिजली की व्यवस्था की गई पर फिर भी रात को कम लोग ही रुकते है यहां” जंगल व जानवर भी काफी है “सच तो यह है कि इसी रास्ते अंग्रेजों के दा्रा बिछाई गई ” Rail ” की पटरी भी है क्योंकि पटरी मे बिछने वाली स्लीपर ( सरई या सागौन ) की लकड़ी से ही तैयार की जाती थी या बनायी जाती है जो Rail के माध्यम से ही अन्य स्थानों पर भेजी जाती थी क्योंकि जंगल काफी थे और आज भी इसके सबूत देखे जा सकते हैं और वर्तमान सर्वे भी Railline का इसी रेल्वे ट्रेक पर किया गया है तो एक बार” कोटलभट्टी ” जाकर देखिए खामोश चेहरे पर लाखों पहरे होते हैं,
हंसती हुई आंखों में जख्म बड़े गहरे होते हैं।