राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी (मध्य प्रदेश) — केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आज देशभर में भारत बंद और आम हड़ताल का आयोजन किया गया। इस दौरान आयुध निर्माणी कटनी (ऑर्डनेंस फैक्ट्री) में भी सैकड़ों कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से विरोध प्रदर्शन किया। यूनियनों का अनुमान है कि देशव्यापी इस हड़ताल में करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल हुए, जिससे बैंकिंग, परिवहन, बिजली और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ा।
ट्रेड यूनियनों ने चार नए श्रम कोड्स, निजीकरण, निगमीकरण, आउटसोर्सिंग, एनपीएस के स्थान पर यूपीएस की बहाली, अनुकंपा नियुक्ति की मांग, बिजली संशोधन विधेयक 2025, बीज विधेयक तथा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसी नीतियों को मजदूरों, किसानों और राष्ट्र-विरोधी बताते हुए इनके विरोध में हड़ताल का बुलावा दिया था। INTUC, AITUC, CITU, HMS सहित अन्य प्रमुख यूनियनों ने इस आंदोलन को मजबूती प्रदान की।
कटनी में विरोध की प्रमुख झलकियां ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉयी फेडरेशन (एआईडीईएफ) और इंटक से संबद्ध मजदूर संघों तथा आफ कर्मचारी यूनियन के आवाहन पर आयुध निर्माणी कटनी के कर्मचारियों ने सुबह से ही नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
कर्मचारियों ने काले बैच लगाकर पूरे दिन ड्यूटी की।दोपहर में एक घंटे का लंच बॉयकाट कर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई।
एचएमएस समर्थित मजदूर संघ, आफ कर्मचारी यूनियन (इंटक) और लेबर यूनियन ने कार्यक्रम को सफल बनाया, जिसमें सैकड़ों कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
हालांकि, बीएमएस (भारतीय मजदूर संघ) समर्थित यूनियन ने इस आंदोलन का विरोध किया और सरकार का सहयोग करते हुए कर्मचारियों के प्रदर्शन के खिलाफ पत्र लिखकर लामबंद हुई। इससे कर्मचारियों में उहापोह की स्थिति बनी रही। मजदूर सरकार की नीतियों से परेशान तो हैं, लेकिन यूनियनों के बीच मतभेद के कारण पूर्ण एकजुटता नहीं बन पाई।
यह विरोध जुलाई 2025 में हुई देशव्यापी हड़ताल की याद दिलाता है, जिसमें कटनी के कर्मचारियों ने स्वेच्छा से एक घंटे का कार्य बॉयकाट किया था। इस बार भी मजदूरों ने मजबूती दिखाई, लेकिन आंतरिक मतभेद चुनौती बने रहे।
यह हड़ताल मजदूर वर्ग की एकजुटता और केंद्र सरकार से नीतिगत बदलाव की मांग को रेखांकित करती है। विभिन्न राज्यों में रैलियां, धरने और नारेबाजी के साथ विरोध जारी रहा, जबकि कुछ क्षेत्रों में सेवाओं पर मिला-जुला प्रभाव देखा गया।