जाकिर झंकार:आहवा
डांग जिले के प्रसिद्ध पारंपरिक उत्सव डांग दरबार के शुभारंभ के साथ ही इस ऐतिहासिक लोकमेले में डांग के साथ-साथ महाराष्ट्र और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े हैं।
महाराष्ट्र के सराड क्षेत्र से आईं मेले की आगंतुक श्रीमती सरोजबेन भोये ने डांग दरबार के उत्कृष्ट आयोजन और व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि डांग जिला प्रशासन द्वारा मेले का अत्यंत सुंदर और सुव्यवस्थित आयोजन किया गया है। वे पिछले 28 वर्षों से इस मेले में आ रही हैं, लेकिन इस वर्ष सरकार द्वारा आगंतुकों के लिए विभिन्न सुविधाओं के साथ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को एक ही स्थान पर प्राकृतिक उत्पादों और हस्तनिर्मित वस्तुओं के स्टॉल आवंटित करने की पहल विशेष रूप से प्रशंसनीय है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सखी मंडल संचालित करने वाली आदिवासी महिलाएँ अब अपने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय कर पा रही हैं। प्राकृतिक उत्पादों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं को स्टॉल आवंटित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और प्रोत्साहित करने का सराहनीय कार्य किया गया है। इसके लिए उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि ‘डांग दरबार’ के इस ऐतिहासिक लोकमेले में 45 से अधिक स्थानीय सखी मंडलों को स्टॉल आवंटित किए गए हैं, जबकि बाहर से आए 950 से अधिक व्यापारियों को भी प्लॉट दिए गए हैं।
मेले में आने वाले लोगों को एक ही स्थान पर ‘प्राकृतिक डांग’ के विविध उत्पादों और हस्तकला वस्तुओं की खरीदारी का अवसर मिले, इसके लिए डांग जिला कलेक्टर शालिनी दुहान के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा विशेष रूप से सखी मंडलों के स्टॉल स्थापित किए गए हैं। इस सराहनीय प्रयास का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाते हुए उन्हें पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।