जाकिर झंकार: आहवा
डांग जिला पंचायत, आहवा द्वारा वर्ष 2026–2027 के लिए वार्षिक बजट तैयार कर सामान्य सभा की बैठक में सर्वसम्मति से मंजूर किया गया।
डांग जिला पंचायत की लेखा शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026–2027 के लिए कुल ₹442 करोड़ से अधिक का विकासोन्मुख बजट सामान्य सभा में पारित किया गया।
यह बैठक डांग जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती निर्मलाबेन गाइन की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत के सभी सदस्य, जिला विकास अधिकारी श्री के. एस. वासावा, नायब जिला विकास अधिकारी श्री हिरल पटेल, लेखा अधिकारी श्री आर. बी. चौधरी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
गुजरात राज्य देश के विकास में अग्रणी है और राज्य के विकास में डांग जिले का भी महत्वपूर्ण योगदान है। डांग की भौगोलिक स्थिति विशेष है, क्योंकि यह एक पहाड़ी क्षेत्र है और जिले का लगभग 90 प्रतिशत भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। जिले में वर्षा पर्याप्त मात्रा में होती है, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सिंचाई क्षेत्र का विकास सीमित है। इसके बावजूद कृषि क्षेत्र में धीरे-धीरे प्रगति हो रही है। गुजरात सरकार ने डांग जिले को प्राकृतिक कृषि जिला घोषित किया है।
गुजरात के इस जिले में एक भी औद्योगिक कारखाना नहीं है। इसके बावजूद विभिन्न विकास योजनाओं के माध्यम से जिले का सर्वांगीण विकास करने के प्रयास किए जा रहे हैं। गांवों में सड़कों और पुलों के निर्माण से अब कई गांव सीधे जिला मुख्यालय से जुड़ चुके हैं।
सिंचाई, कृषि, पशुपालन जैसी योजनाओं के कारण खेती के क्षेत्र में भी विकास हुआ है और लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिला है। जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएँ लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
डांग जिला पंचायत को कोई विशेष राजस्व आय प्राप्त नहीं होती। न तो कर वसूली से और न ही खनिज उत्पादन से कोई आय होती है। पंचायत मुख्य रूप से वन उपज की 10 प्रतिशत आय पर निर्भर है। इस कारण पंचायत के पास आय के स्रोत बहुत सीमित हैं।
डांग जिले में कुल तीन तालुका हैं। सीमित आय के बावजूद प्रशासनिक और विकास कार्यों का खर्च बढ़ रहा है। इसलिए आय के नए स्रोतों पर विचार करना आवश्यक माना जा रहा है। सरकारी अनुदान के बिना जिले का विकास बजट तैयार करना काफी कठिन है। फिर भी उपलब्ध सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए यह बजट तैयार किया गया है।
जिला पंचायत के सचिव और जिला विकास अधिकारी के समन्वय तथा पदाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के सहयोग से इस बजट का मसौदा तैयार किया गया।
वर्ष 2025–2026 के संशोधित तथा वर्ष 2026–2027 के अनुमानित बजट के अनुसार:
स्वभंडोल मद: ₹495 लाख
सरकारी मद: ₹4182 लाख
ऋण विभाग मद: ₹1941 लाख
जिला पंचायत द्वारा विकास कार्यों के लिए (तीनों तालुका पंचायतों सहित) ₹75 लाख स्वभंडोल से तथा ₹644 लाख सरकारी मद से योजना बनाई गई है।
विभागवार प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
कृषि क्षेत्र: ₹14.30 लाख (स्वभंडोल), ₹256.16 लाख (सरकारी मद)
पशुपालन: ₹1.10 लाख (स्वभंडोल), ₹311.05 लाख (सरकारी मद)
स्वास्थ्य: ₹10 लाख (स्वभंडोल), ₹3520 लाख (सरकारी मद)
निर्माण कार्य: ₹78.32 लाख (स्वभंडोल), ₹11750 लाख (सरकारी मद)
सिंचाई: ₹20 लाख (स्वभंडोल), ₹1447.70 लाख (सरकारी मद)
शिक्षा: ₹24.72 लाख (स्वभंडोल), ₹16955.50 लाख (सरकारी मद)
जिले के विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार द्वारा योजना मंडल, आदिवासी उपयोजना क्षेत्र, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि तथा अन्य विभागों से भी सहायता प्राप्त होती है। इसके अलावा मनरेगा योजना के तहत रोजगार के साथ-साथ आधारभूत ढांचे का विकास भी किया जा रहा है।
सीमित आय के बावजूद जिले के सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जा रहा है। अंत में जिला पंचायत अध्यक्ष ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए बजट को मंजूरी प्रदान की।