दुद्धी (सोनभद्र)।रमजान के पवित्र महीने में दुद्धी विकास खंड अंतर्गत के महुली की धरती पर उस समय एक अनोखी और दिल को छू लेने वाली तस्वीर उभरी, जब नूरी जमा मस्जिद के प्रांगण में आयोजित रोजा इफ्तार कार्यक्रम में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक साथ बैठकर रोजा खोला। यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आपसी प्रेम, सम्मान और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश बनकर उभरा।
ग्राम प्रधान अरविंद जायसवाल की अगुवाई में आयोजित इस भव्य इफ्तार में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। इफ्तार के दौरान पूरे परिसर में भाईचारे, सौहार्द और इंसानियत की खुशबू फैली रही। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर रमजान की मुबारकबाद दी और देश में अमन-चैन, तरक्की व खुशहाली की दुआ मांगी।
अंजुमन कमेटी सदर कलामुदीन सिद्दीकी ने अपने संबोधन में कहा कि रमजान का महीना हमें इंसानियत, सब्र और त्याग का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जब अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ बैठकर इफ्तार करते हैं, तो यह हमारे समाज की गंगा-जमुनी तहजीब की सबसे खूबसूरत झलक होती है। महुली का यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनेगा।
बसपा जिला उपाध्यक्ष सेकरार अहमद ने कहा कि आज के समय में इस तरह के आयोजन समाज को जोड़ने का सबसे मजबूत माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि महुली में जो दृश्य देखने को मिला, वह यह साबित करता है कि हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सभी से आपसी प्रेम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
ग्राम प्रधान अरविंद जायसवाल ने कहा कि यह आयोजन दिलों को जोड़ने की एक छोटी-सी कोशिश है। उन्होंने कहा कि महुली की पहचान हमेशा से भाईचारे और आपसी सहयोग के लिए रही है, और इस परंपरा को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे आयोजन समाज को और अधिक मजबूत बनाएंगे।
इस अवसर पर रमीज आलम पूर्व सदर अंजुमन कमेटी महुली, मु० सिकंदर रिजवी, अवधेश कुमार कन्नौजिया, भगवानदास, प्रदीप कुमार जायसवाल, बुधनाथ कन्नौजिया, वीरेंद्र कन्नौजिया, विनोद कन्नौजिया, राजेश शर्मा, दीपक कुमार (अधिवक्ता), मु० सैयद, सेराज अंसारी, अवनर आलम, मुस्तकीम आलम, यूनुस आलम (सचिव), अमानुल्लाह, मेराज अंसारी, ओम प्रकाश पनिका, अरुण गुप्ता, शमशेर सहित सैकड़ों क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
महुली में आयोजित यह रोजा इफ्तार कार्यक्रम एक मिसाल बन गया, जिसने यह संदेश दिया कि धर्म चाहे अलग हों, लेकिन दिल एक होने चाहिए। यह आयोजन न सिर्फ एक शाम का कार्यक्रम रहा, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे की मजबूत नींव रखने वाला यादगार पल बन गया।