नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग।
झारखंड के हजारीबाग जिले में रामनवमी का उत्सव अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। वर्ष 2026 की रामनवमी को अत्यंत शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने हेतु जिला प्रशासन एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने कमर कस ली है। समाहरणालय भवन से जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 169 के माध्यम से प्रशासन ने अखाड़ा समितियों, आयोजकों और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यापक नियमावली प्रस्तुत की है। इस विस्तृत लेख में हम उन सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे जो इस महापर्व के दौरान नागरिक सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।
हजारीबाग का प्रशासन इस वर्ष तकनीक और जनभागीदारी के समन्वय पर विशेष बल दे रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जुलूस के रूट निर्धारित कर दिए गए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि सभी आयोजक केवल प्रशासन द्वारा स्वीकृत मार्गों का ही चयन करें और समय सीमा का कड़ाई से पालन करें। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाए रखने के लिए वाहनों के पड़ाव हेतु विशिष्ट स्थान चिह्नित किए गए हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे कम से कम निजी वाहनों का उपयोग करें ताकि पैदल चलने वाले भक्तों को असुविधा न हो।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से वॉलेंटियर्स की भूमिका इस बार अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जिला प्रशासन ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक जुलूस के साथ अनुशासित वॉलेंटियर्स की एक टीम होनी चाहिए। इन वॉलेंटियर्स को जुलूस शुरू होने से पहले विस्तृत ब्रीफिंग दी जानी आवश्यक है ताकि वे भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन स्थितियों में सेतु का कार्य कर सकें। विशेष रूप से छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों की जेब में एक पर्ची अवश्य रखें जिसमें नाम, पता और मोबाइल नंबर अंकित हो। यह छोटी सी सावधानी भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बच्चों के बिछड़ने की स्थिति में उन्हें सुरक्षित वापस लाने में सबसे बड़ी मददगार साबित होती है।
आधुनिक दौर में सोशल मीडिया की भूमिका दोधारी तलवार जैसी होती है। हजारीबाग पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, आपत्तिजनक वीडियो या सांप्रदायिक टिप्पणी साझा करना कानूनी अपराध की श्रेणी में आएगा। भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। नागरिकों से अपेक्षा है कि वे जिम्मेदारी का परिचय दें और ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाने को दें। डिजिटल अनुशासन ही सामाजिक शांति की पहली शर्त है। इसी क्रम में ध्वनि प्रदूषण और सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए केवल अनुमोदित भजनों और गीतों को ही बजाने की अनुमति दी गई है। अखाड़ा समितियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके माध्यम से प्रसारित होने वाला संगीत किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुँचाए।
धार्मिक उत्साह के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने जुलूस के दौरान तेज धारदार हथियारों के प्रदर्शन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आतिशबाजी और पटाखों के प्रयोग से बचने की सलाह दी गई है ताकि आगजनी या भगदड़ जैसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। यदि कहीं भी आगजनी की घटना होती है, तो तत्काल अग्निशमन विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध वस्तुओं और व्यक्तियों के प्रति सतर्कता बरतना हर नागरिक का कर्तव्य है। किसी भी लावारिस वस्तु को छूने के बजाय तुरंत कंट्रोल रूम के नंबरों या पुलिस को सूचित करना चाहिए।
एक स्वच्छ और नशामुक्त उत्सव की परिकल्पना करते हुए प्रशासन ने शराब और अन्य मादक पदार्थों के सेवन को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। सार्वजनिक स्थानों पर नशा करना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह पर्व की पवित्रता को भी खंडित करता है। संवेदनशील इलाकों में विशेष एहतियात बरतते हुए मकानों की छतों पर ईंट, पत्थर या अन्य निर्माण सामग्री रखने की मनाही की गई है। यह कदम असामाजिक तत्वों द्वारा की जाने वाली संभावित पत्थरबाजी या उपद्रव को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। पशु मालिकों से भी अनुरोध किया गया है कि वे अपने मवेशियों को सड़कों पर खुला न छोड़ें ताकि जुलूस के मार्ग में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
हजारीबाग जिला प्रशासन ने जिला नियंत्रण कक्ष के माध्यम से चौबीसों घंटे सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। किसी भी आकस्मिक सहायता के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर सक्रिय रहेंगे। अंततः, रामनवमी का यह पावन अवसर हम सभी को एकता और भाईचारे का संदेश देता है। प्रशासन के इन दिशा-निर्देशों का पालन करना न केवल कानूनी बाध्यता है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक होने का प्रमाण भी है। सभी के सहयोग से ही हजारीबाग एक बार फिर मिसाल पेश कर सकता है कि कैसे अनुशासन और भक्ति के संगम से बड़े आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न किए जा सकते हैं।