मध्यप्रदेश के कटनी जिला अंतर्गत स्थित कैमोर नगर आज एक बड़े जनआंदोलन का केंद्र बनता जा रहा है। औद्योगिक और शैक्षणिक दृष्टि से तेजी से उभर रहे इस क्षेत्र को उप-तहसील (Sub-Tehsil) का दर्जा देने की मांग अब केवल एक प्रशासनिक प्रस्ताव नहीं, बल्कि जनभावनाओं का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। स्थानीय नागरिक, व्यापारी वर्ग, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि एकजुट होकर इस मांग को बुलंद कर रहे हैं।
कैमोर लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां स्थापित बड़े उद्योगों में हजारों कर्मचारी, अधिकारी और श्रमिक कार्यरत हैं, जिनकी आजीविका इस नगर से जुड़ी हुई है। औद्योगिक विकास के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी कैमोर ने उल्लेखनीय प्रगति की है। नगर में संचालित स्कूलों और कॉलेजों में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। इस प्रकार कैमोर न केवल आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि ज्ञान और अवसरों का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।
इसके बावजूद प्रशासनिक सुविधाओं का अभाव क्षेत्रवासियों के लिए लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है। कैमोर से जुड़े लगभग 25 से 50 गांवों के लोगों को नामांतरण, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए 08 से 15 किलोमीटर दूर स्थित विजयराघवगढ़ जाना पड़ता है। कागजों पर यह दूरी भले ही कम लगे, लेकिन ग्रामीण परिवेश, सीमित संसाधनों और परिवहन की कमी के कारण यह आमजन के लिए समय और धन दोनों की दृष्टि से भारी पड़ती है।
विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और किसानों को छोटी-छोटी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि उनके दैनिक कार्य भी प्रभावित होते हैं। यदि कैमोर को उप-तहसील का दर्जा मिल जाता है, तो इन सभी सेवाओं की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित हो सकेगी और आमजन को बड़ी राहत मिलेगी।
इस मुद्दे को नगर परिषद कैमोर के अध्यक्ष ने गंभीरता से उठाया है। उन्होंने क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए विजयराघवगढ़ विधानसभा के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से चर्चा कर कैमोर को उप-तहसील बनाने का प्रस्ताव रखा है। नगर परिषद के उपाध्यक्ष संतोष केवट और नव-निर्वाचित पार्षदगण भी इस दिशा में सक्रिय प्रयास कर रहे हैं।
नगर के गणमान्य नागरिकों राजेश सिंघई, अंकुर ग्रोवर अजय शर्मा(पप्पू भैया) सुरेश परोहा, गुरदीप सिंह बेदी, सुभाष ग्रोवर, राजा दुबे, पुष्पराज सिंह, भूपेंद्र सिंह चौहान, संतशरण सिंह, श्याम गुप्ता, आसिफ खान,सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारी संगठनों ने भी इस मांग का जोरदार समर्थन किया है। यह व्यापक समर्थन इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा अब केवल कुछ लोगों की मांग नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक आवश्यकता बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कैमोर को उप-तहसील का दर्जा मिलने से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और गति आएगी। राजस्व प्रबंधन अधिक सुदृढ़ होगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और आधारभूत संरचना के विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
वर्तमान समय में जब सरकार ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के संतुलित विकास की बात कर रही है, तब कैमोर जैसे औद्योगिक और शैक्षणिक रूप से समृद्ध क्षेत्र को प्रशासनिक रूप से सशक्त करना अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं होगा, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है-क्या शासन-प्रशासन जनभावनाओं को समझते हुए इस मांग को जल्द स्वीकार करेगा? या फिर कैमोर की जनता को अपनी ही पहचान के लिए संघर्ष जारी रखना पड़ेगा?
कैमोर की सड़कों पर उठती आवाजें अब साफ कह रही हैं
विकास के साथ पहचान भी चाहिए और वो भी अब!
इंडियन टीवी न्यूज़ कैमोर से श्याम गुप्ता की रिपोर्ट