किशोर कुमार दुर्ग छत्तीसगढ़ ब्यूरो चीफ इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
पूरे भारत में प्राइवेट स्कूलों की महंगी किताबों की समस्या बहुत बड़ी बन चुकी है। माता-पिता को मजबूरी में महंगे “बुक सेट”खरीदने पड़ते
जबकि नियम इसके खिलाफ हैं।
समस्या क्या है?
कई प्राइवेट स्कूल NCERT/SCERT की सस्ती किताबों की जगह महंगी प्राइवेट किताबें लगाते हैं
माता-पिता को एक ही दुकान या स्कूल से किताब खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है
किताबों का खर्च ₹3000–₹10000 तक पहुंच जाता है
कई बार किताबें 10 गुना तक महंगी होती हैं NCERT से
हर साल नई किताबें बदल दी जाती हैं ताकि पुरानी reuse न हो सके
यह सीधे तौर पर “शिक्षा का व्यवसायीकरण” (commercialization) है।
कानून क्या कहता है?
CBSE/सरकार के नियम:
स्कूल किसी खास दुकान से किताब खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते
NCERT किताबों को प्राथमिकता देनी चाहिए
हाल ही में सरकारों ने चेतावनी भी दी है कि ऐसा करने पर कार्रवाई होगी
कई जगह स्कूलों पर जुर्माना भी लगाया गया है
समाधान क्या है? (व्यवहारिक + सिस्टम स्तर)
पालक एकजुट हों (सबसे जरूरी)
अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता
100–200 पालक मिलकर:
लिखित शिकायत करें
स्कूल प्रबंधन पर दबाव डालें
यह सबसे प्रभावी तरीका है
शिकायत कहाँ करें?
आप इन जगहों पर शिकायत कर सकते हैं:
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)
कलेक्टर कार्यालय
राज्य शिक्षा विभाग
CBSE/Board की वेबसाइट
CPGRAMS (सरकारी ऑनलाइन पोर्टल)
कई मामलों में शिकायत के बाद जांच और कार्रवाई हुई है
विकल्प अपनाएं
किताब की लिस्ट लेकर:
बाहर की दुकानों में पूछें (सस्ता मिलता है)
सीनियर स्टूडेंट्स से सेकंड हैंड किताबें लें
PDF / डिजिटल किताबें उपयोग करें (जहां संभव हो)
मीडिया और सोशल मीडिया का उपयोग
लोकल न्यूज़, सोशल मीडिया पर मुद्दा उठाएं
इससे प्रशासन जल्दी एक्शन लेता है
सरकार स्तर पर जरूरी सुधार
(यह लंबी अवधि का समाधान है)
NCERT किताब अनिवार्य हो
स्कूल को किताब बेचने पर प्रतिबंध
हर जिले में “निरीक्षण टीम” बने
फिक्स प्राइस सिस्टम लागू हो
कुछ राज्यों में इस पर कार्रवाई शुरू भी हो चुकी है
सीधी बात
समस्या का असली कारण है:
स्कूल + पब्लिशर + दुकान का गठजोड़
नियम हैं, लेकिन पालन नहीं होता
असली समाधान: “पालकों की एकता + शिकायत + प्रशासनिक दबाव”