रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय
मैहर को जिला बने ढाई वर्ष पूरे हो चुके है जिले में कलेक्टर मैहर को स्थापित हुए भी उतना ही समय हो गया, लेकिन मैहर की समस्याएं जस की तस है, समस्या चाहे ओवर लोड वाहनों की हो अवैध माइनिंग की हो शहरी व्यवस्था की हो या कानूनी, दीवानी की हो या मां शारदा मंदिर में संचालित रोपवे और मंदिर में आने वाली आए में कुठाराघात की हो भ्रष्टाचार का ग्राफ 10 गुना रफ्तार से बढ़ा है जिला कलेक्टर आदिवासियों की जमीन फैक्ट्री को सौंपने में व्यस्त होने के साथ फैक्ट्री आबकारी, सांसद और विधायक की कार गुजरी में मस्त रही है ढाई वर्षों में यदि कुछ काम हुआ है तो वो है कार्यवाहियों को छुपाना और हित बद्ध नेताओं को प्रसन्न रखना, मैहर कलक्टर विगत ढाई वर्षों से रोपवे की चौंकीदारी में मस्त है जरा सोचिए किसी प्राइवेट अवैध ब्लैक लिस्टेड कंपनी को कलेक्टर जैसा चौंकीदार मिल जाए तो उसकी तो बल्ले बल्ले हो जाएगी, वही हो भी रहा है रोपवे में स्थानीय लोगों का अपमान कराने में जितना स्थानीय जन प्रतिनिधि मस्त रहे है उससे ज्यादा जोर कलेक्टर मैहर ने लगाया है, जिस विभाग की चाही बेइज्जती करा दी जिसे चाहा उसे व्यवस्था दिया, रोपवे जो पूर्ण रूप से अवैध रूप से लाभ ले रहा है उसे जिला कलेक्टर का सहारा यूंही तो नहीं मिला मैहर वालों ये बताने की जरूरत नहीं है, इधर जब मुखिया ही भ्रष्ट होगा जड़ ही फफूंद से भरी होगी तब वृक्ष की डाली शाखाएं पत्ते कैसे होंगे इसे भी जान लीजिए, हालिया जानकारी के अनुसार समिति के एक सदस्य द्वारा रोपवे के भरी अतिक्रमण से 10 लाख रुपए का सौदा किए जाने और 5 लाख की पेशगी प्राप्त करने की जानकारी है बताया जा रहा है कि जेपी अन्नकूट और स्वास्तिक कॉम्प्लेक्स से लगे अतिक्रमण को बचाने का वादे के अनुरूप ये सौदा हुआ है यह सौदा मुख्य रूप से कलेक्टर मैहर के नाम से किया गया है और यह वजह है कि समिति प्रबंधन कलेक्टर के आदेश नहीं प्राप्त कर पा रहा है, रोपवे में भी छोटे अतिक्रमण कारियो को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए लेकिन बड़े अतिक्रमण को फलने फूलने का वरदान दिया गया है, नवरात्रि के ठीक पहले कलेक्टर और प्रशासक के इस जोड़े ने पैदल बाजार में तांडव मचा दिया था लेकिन अब इसी जोड़े की हिम्मत रोपवे एरिया के अतिक्रमण की जाने की नहीं पड़ रही है, कलेक्टर मैडम तो झांकने नहीं जा रही है कि कही कोई सवाल न पूंछ ले जवाब क्या देंगे,