जिला ब्यूरो चीफ प्रवीण कुमार
इटावा। बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को किसी भी जाति ,धर्म व वर्ग की सीमा के बंधन में नहीं बांधा जा सकता, वह महामानव थे। उन्होंने भारतीय संविधान की संरचना की जिसमें उन्होंने सबके हितों का ख्याल रखा।

यह विचार कौमी तहफ़्फ़ुज़ कमेटी के संयोजक खादिम अब्बास ने स्थानीय बुद्ध बिहार सहित डॉ बौद्ध महाविद्यालय नगला खादर में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष में आयोजित श्रद्धा सुमन संगोष्ठी में विचार व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि बाबा साहब समतामूलक समाज के प्रबल पक्षधर थे। वह जाति विहीन समाज की स्थापना करना चाहते थे ।

ख़ादिम अब्बास ने कहा कि डॉ अंबेडकर ने कहा था कि राजनीतिक सत्ता वह मास्टर चाबी है जिससे हर तिजोरी का ताला खोला जा सकता है। हम, आप, सब अपनी नासमझी के कारण सत्ता से वंचित हो रहे हैं। जिसके कारण बहुजन समाज की दुर्दशा हो रही है ।अंबेडकर , ने कहा था कि जहां सहनशीलता की सीमाएं समाप्त होती हैं
वहां क्रांति जन्म लेती है ।आज जान बूझकर भारतीय संविधान का निरादर दलित ,शोषित एवं पिछड़े वर्ग को अपना गुलाम बनाए रखने के लिए यथास्थिति व्यवस्था के पोषकों द्वारा किया जा जा रहा है। भाजपा सरकार द्वारा सरकारी विभागों का निजीकरण किया जाना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। मोदी सरकार जानबूझकर एक षड्यंत्र के तहत दलित व पिछड़े वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को समाप्त करना चाहती है। भाजपा सरकार की नीति और नियत दोनों ही दबे, कुचले, सर्वहारा समाज के विरुद्ध है, इससे सावधान रहने की आवश्यकता है ।
ख़ादिम अब्बास ने कहा कि डॉ आंबेडकर के रुके कारवां को आगे बढ़ाने का काम बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम ने किया।कांशीराम के 15 व 85 के नारे से ही साम्प्रदायिकतावादी शक्तियों को परास्त करके ही डॉ भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान की रक्षा की जा सकती है।
जयंती के मौके पर रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश पुलिस आई पी एस एवं देश शक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस. एन. चक ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समय सोने का नहीं है बल्कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान को बचाने का है।
उन्होंने हमें वोट रूपी अनमोल हथियार दिया है जिसका सही इस्तेमाल करके सर्वहारा, दलित समाज भारत का शासक बन सकता है ।हमें संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए संगठित होने की आवश्यकता है ,तभी हम, आप, सब यथास्थितिवादियों से देश की रक्षा कर सकते हैं।
एस. एन. चक साहब ने कहा कि आज देश विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है ।लोकतंत्र की सरेआम हत्या की जा रही है। ईवीएम का दुरुपयोग हो रहा है। इसके माध्यम से अल्पमत को बहुमत में बदलने की कुचेष्टा की जा रही है। डॉक्टर अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि
उन्होंने हमें जो वोट रूपी हथियार और संविधान दिया है, उसकी रक्षा हमें प्राणों की बाजी लगाकर करनी चाहिए ।यदि हमने ऐसा प्रयास नहीं किया तो आने वाली हमारी संताने शूट – बूट और टाई पहनने के लिए तरस जाएंगी। यह बात बहुजन समाज को समझनी पड़ेगी,
तब कहीं जाकर उसका उत्थान और कल्याण होगा ।उन्होंने कहा कि आज भारत को हिंदुस्थान बनाने की नापाक कोशिश की जा रही है ,जिसे बाबा साहब डॉक्टर भीमराव ने नहीं होने दिया था।हमारे भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ही डॉ भीमराव अंबेडकर ने लिख दिया था। इंडिया दैट इज भारत ।आज हमें साम्प्रदायिकतावादी शक्तियों से भारतीय संविधान बचाना है।
इंसानी भाईचारा एवं प्रेम- सदभाव समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद आमीन भाई ने कहा कि डॉ अंबेडकर ने कहा था कि शिक्षा शेरनी का वो दूध है जो इसे पियेगा वही दहाडेगा ।हम भूखे प्यासे रह लें, लेकिन हमें अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने से पीछे नहीं रहना चाहिए ।
आमीन भाई ने कहा कि हमें राजनीति में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए ,सांप्रदायिकतावादी शक्तियां भारत के भाईचारा को तोड़कर सत्ता में बने रहने का कुचक्र रच रही है ,इसलिए वह देश में नफरत और घ्रणा की खेती करने में व्यस्त हैं ।
वरिष्ठ पत्रकार शेखर यादव ने कहा कि हमें डॉक्टर अंबेडकर जयंती पर याद कर लेना चाहिए कि हमें संविधान के शत्रुओं को अब गांव- गली तथा खेत खलियान तक बेनकाब करना है ,बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर ने हर बालिग को वोट का अधिकार दिलाया है और राजा –
रानी के साथ राजा और रंक का भेद समाप्त किया है ।इस वोट रूपी हथियार से संविधान और लोकतंत्र विरोधी शक्तियों को परास्त करना है ,तब जाकर देश के मूल निवासियों की बिगड़ी बात बनेगी ।
डी आर दोहरे ने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर के 40 साल संघर्ष करने के बाद हमें वोट का अधिकार और भारतीय संविधान व आरक्षण प्राप्त हुआ है ।आज विघटनवादी एवं संप्रदायिकतावादी शक्तियां इन तीनों अनमोल हथियारों से हमें वंचित कर देना चाहती हैं।
पी डी राही ने कहा कि दबे कुचले और सर्वहारा वर्ग को जो कुछ हासिल हुआ है वह सब कुछ डॉक्टर अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान के जरिए प्राप्त हुआ है। इसलिए फिरकापरस्त ताकते भारतीय संविधान को बदल देना चाहती हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश प्रताप सिंह धनगर ने कहा कि संघ परिवार और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व संविधान और लोकतंत्र विरोधी है ।संघ और मोदी जानबूझकर पिछड़े वर्ग की जाति गत जनगणना नहीं होने दे रहे हैं। उन्होंने बाबा साहब के संविधान का अपमान किया है। और आरक्षण को समाप्त करने के लिए उन्होंने सरकारी विभागों का निजीकरण किया है।
संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार विजेंद्र तमूरी ,अनिल चक ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
डॉ अम्बेडकर बौद्ध महाविधालय में प्राचार्य मुकेश कुमार ,की देख रेख में श्रदा सुमन कार्यक्रम आयोजित किया गया ।जिसमें होतीलाल दोहरे ,सभासद श्याम सिंह ,सत्यनरायण बौद्ध ,विनोद कुमार ,अभिलाख सिंह ,बादशाह सहायक ,बड़े बाबू बादशाह ,सतीश कुमार आदि ने तथागत गौतमबुद्ध व डॉ भीमराव अंबेडकर चित्र पर श्रदा सुमन अर्पित करके उनके मिशन को जन जन तक पहुंचाने की प्रतिज्ञा की।