प्रीतम यादव ब्यूरो चीफ कबीरधाम छत्तीसगढ़ इंडियन टीवी न्यूज़ नेशनल
पांडातराई — नगर पंचायत क्षेत्र में निराश्रित गौवंश के कारण उत्पन्न हो रही गंभीर समस्याओं, निरंतर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और किसानों की फसलों के नुकसान को लेकर स्थानीय युवाओं एवं किसान भाइयों ने शुक्रवार को नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर नगर पंचायत अधिकारी (CMO) के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रशासन से गौवंश के संरक्षण एवं सुरक्षा हेतु तत्काल प्रभाव से गौशाला एवं चारागाह निर्माण कराने का विनम्र अनुरोध किया गया है।
सड़कों पर गौवंश का जमावड़ा, बढ़ते सड़क हादसे
ज्ञापन में स्थानीय युवाओं ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि वर्तमान में पांडातराई नगर की सड़कों पर 50 से 60 की संख्या में निराश्रित गौवंश दिन-रात विचरण कर रहे हैं। उचित आश्रय और चारे की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण ये बेसहारा गौवंश मुख्य मार्गों को ही अपना बसेरा बना चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप आए दिन गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। इन हादसों में न केवल मूक गौवंश असमय मृत्यु का शिकार हो रहे हैं, बल्कि नगर के वाहन चालक भी गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं और आमजन को जान-माल की भारी क्षति उठानी पड़ रही है।
किसानों की फसलें हो रही बर्बाद
क्षेत्र के किसान भाइयों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि चारागाह और गौशाला के अभाव में भूखे निराश्रित गौवंश किसानों के खेतों का रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी कड़ी मेहनत से तैयार फसलें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए यह गंभीर आर्थिक संकट का कारण बनता जा रहा है। युवाओं का कहना है कि पांडातराई जैसे बड़े क्षेत्र में गौशाला का न होना शासन की मंशा और नियमों के पूर्णतः विपरीत है।
प्रशासन से कांजी हाउस की तत्काल मांग
स्थानीय युवाओं ने सीएमओ से निवेदन किया है कि जनहित और गौ-सेवा को दृष्टिगत रखते हुए नगर में अविलंब गौशाला एवं चारागाह का निर्माण सुनिश्चित किया जाए। जब तक स्थायी गौशाला की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक इन निराश्रित गौवंशों को सुरक्षित रखने हेतु ‘कांजी हाउस’ या अस्थायी बाड़े की व्यवस्था तत्काल की जाए, ताकि सार्वजनिक मार्ग पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
अल्टिमेटम: 25 दिनों में समाधान नहीं तो आंदोलन
नगर के युवाओं और किसान भाइयों ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टिमेटम दिया है कि यदि आगामी 25 दिनों के भीतर इस गंभीर समस्या का ठोस समाधान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो समस्त नगरवासी एवं किसान भाई शांतिपूर्ण ढंग से चक्का जाम, धरना प्रदर्शन अथवा उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस स्थिति में समस्त जिम्मेदारी शासन और नगर पंचायत प्रशासन की होगी।