शहजाद आलम, जिला संवाददाता
सिद्धार्थनगर।
जिले में एक महिला होमगार्ड ने अपने ही विभाग के कमांडेंट पर मानसिक उत्पीड़न, रिश्वत मांगने और प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि वह एक सिंगल मदर है और अपने दिव्यांग व गंभीर रूप से बीमार बच्चे की देखभाल के साथ नौकरी की जिम्मेदारी भी निभा रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी उसकी मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
खाकी वर्दी को हमेशा सुरक्षा, सेवा और न्याय का प्रतीक माना जाता है, लेकिन जब उसी व्यवस्था के भीतर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों पर शोषण के आरोप लगें तो कई सवाल खड़े हो जाते हैं। पीड़ित महिला का आरोप है कि ड्यूटी लगाने और राहत देने के नाम पर उससे रिश्वत की मांग की गई। इतना ही नहीं, उसकी परिस्थितियों को नजरअंदाज कर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया।
महिला ने बताया कि उसका छोटा बेटा दिव्यांग होने के साथ हृदय रोग से पीड़ित है। बच्चे का इलाज लगातार चल रहा है और उसे विशेष देखभाल की आवश्यकता रहती है। ऐसे में वह नौकरी और मातृत्व दोनों जिम्मेदारियों को निभाने के लिए संघर्ष कर रही है। पीड़िता का कहना है कि विभाग के उच्चाधिकारी उसकी मजबूरी समझने के बजाय उसे प्रताड़ित कर रहे हैं।
आरोपों के मुताबिक, महिला कई महीनों से मानसिक तनाव झेल रही है। उसने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। महिला का कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो वह उच्च अधिकारियों और महिला आयोग तक अपनी बात पहुंचाएगी।
इस मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि क्या नियम और कानून केवल कमजोर कर्मचारियों पर ही लागू होते हैं? क्या एक असहाय मां की पीड़ा को व्यवस्था समझ पाएगी, या फिर रसूखदार अधिकारी अपने पद और प्रभाव के दम पर मामले को दबाने में सफल हो जाएंगे?
फिलहाल पीड़िता इंसाफ की उम्मीद में प्रशासन के दरवाजे खटखटा रही है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या एक संघर्षरत मां को न्याय मिल पाता है या नहीं।