रिपोर्ट संतन दास
गरियाबंद
जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल घटारानी मंदिर में पेयजल का भारी संकटय उत्पन्न हो गया है। मंदिर परिसर व पार्किंग क्षेत्र के नल पिछले 15 दिनों से पूरी तरह सूखे पड़े हैं, जिससे हजारों श्रद्धालुओं व पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नया बोरवेल भी बेकार, पाइपलाइन फटी
स्थानीय लोगों के अनुसार, जलस्तर नीचे चले जाने से पुराने बोरवेल ने काम करना बंद कर दिया है। प्रशासन द्वारा 10 दिन पहले नया बोरवेल कराया गया था, लेकिन तकनीकी खामी व फटी पाइपलाइन के कारण अब तक नलों में पानी नहीं पहुंच पाया है। पाइपलाइन जगह-जगह से फटी हुई है, जिसे तुरंत बदलने की जरूरत है।
यात्री परेशान, बंदर भटक रहे पानी को
गर्मी के इस मौसम में भी घटारानी में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। पीने के लिए साफ पानी न मिलने से पर्यटकों ने नाराजगी जताई है। एक यात्री ने कहा, “इतना बड़ा पर्यटन स्थल है, पर एक घूंट पानी नसीब नहीं हो रहा। बच्चों को लेकर आए, अब परेशान हैं।”
संकट का असर वन्यजीवों पर भी पड़ा है। पानी की तलाश में जंगली बंदरों के झुंड मंदिर परिसर की दुकानों के आसपास भटकते देखे जा रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बंदर पानी के लिए हमलावर हो रहे हैं।
ट्रस्ट व प्रशासन पर उठे सवाल
स्थानीय ग्रामीण योगेश्वर साहू ने बताया कि पर्यटन सीजन में बुनियादी सुविधा न होना गंभीर लापरवाही है। “जल ही जीवन है, पर यहां इंसान और जानवर दोनों प्यासे हैं। ट्रस्ट और प्रशासन को तुरंत ध्यान देना चाहिए। टैंकर से अस्थायी व्यवस्था भी नहीं की गई है।”
क्या है मांग:
1. नए बोरवेल को 48 घंटे में चालू कर नलों में पानी पहुंचाया जाए
2. फटी पाइपलाइन को तत्काल बदलकर नई लाइन बिछाई जाए
3. गर्मी को देखते हुए टैंकर से अस्थायी पानी की व्यवस्था की जाए
4. भविष्य के लिए जल संरक्षण हेतु रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए
गौरतलब है कि घटारानी छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक व पर्यटन केंद्र है। यहां रोज सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। पेयजल संकट से जिले की छवि पर असर पड़ रहा है।