राजेश कुमार तिवारी इंडियन टीवी न्यूज़
कटनी।
जिले में कोडीन युक्त कफ सिरप और नार्कोटिक्स दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इन दवाओं की बिक्री और खरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। अब बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के कोई भी मेडिकल स्टोर कोडीन या नार्कोटिक्स युक्त दवा नहीं बेच सकेगा।
ड्रग इंस्पेक्टर सोनम जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि कोडीन युक्त दवाओं की थोक और फुटकर बिक्री के लिए मासिक सीमा तय कर दी गई है। नए नियमों के तहत सीएंडएफ एजेंसियों से थोक विक्रेता प्रति पैक साइज अधिकतम 1000 बोतल ही प्राप्त कर सकेंगे। वहीं रिटेल मेडिकल स्टोर एक माह में अधिकतम 50 बोतल तक ही खरीद और बिक्री कर पाएंगे।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई विक्रेता तय सीमा से अधिक मात्रा में दवा की खरीद या बिक्री करता है तो इसकी सूचना तत्काल औषधि निरीक्षक कटनी को ई-मेल या व्हाट्सएप के माध्यम से देना अनिवार्य होगा।
विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मेडिकल स्टोर्स के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। अब हर दवा वितरण के बाद संबंधित डॉक्टर की पर्ची पर मेडिकल स्टोर की सील, हस्ताक्षर और तारीख अंकित करना अनिवार्य रहेगा, ताकि एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग न किया जा सके।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य मरीजों को जरूरी दवाओं से वंचित करना नहीं, बल्कि कोडीन युक्त दवाओं के नशे के रूप में हो रहे दुरुपयोग पर रोक लगाना है। विभाग ने केमिस्ट एसोसिएशन से भी सभी दवा विक्रेताओं को नियमों का सख्ती से पालन कराने की अपील की है।
विशेषज्ञों के अनुसार कोडीन एक ओपिओइड आधारित दवा है, जिसका उपयोग गंभीर खांसी और दर्द के उपचार में किया जाता है। यह शेड्यूल-एच श्रेणी की दवा है और बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। लगातार उपयोग से लत लगना, अत्यधिक नींद आना और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।