किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बिलासपुर।
बिलासपुर स्थित हाई कोर्ट ने धान गबन से जुड़े एक मामले में समिति प्रबंधक की उस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि लगभग 23 लाख रुपये मूल्य का धान चूहों द्वारा खा लिया गया था।
मामला सहकारी समिति में धान की कमी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच के दौरान रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर पाए जाने पर संबंधित प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। अपने बचाव में प्रबंधक ने दावा किया कि गोदाम में रखा धान चूहों द्वारा नष्ट कर दिया गया, जिसके कारण यह कमी सामने आई।
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में धान के नुकसान को केवल चूहों के सिर नहीं मढ़ा जा सकता। न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया मामले में गंभीर अनियमितताओं की जांच आवश्यक है और इस स्तर पर आरोपी को राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत ने प्रबंधक की याचिका खारिज करते हुए जांच और कानूनी कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायालय की टिप्पणी के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
इस फैसले को सार्वजनिक धन और खाद्यान्न भंडारण से जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले की आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।