सहारनपुर- नागल
आर्य समाज बढेड़ी नागल द्वारा आयोजित आर्य वीरांगना शिविर के छठे दिवस का शुभारम्भ प्रातः व्यायाम एवं शारीरिक प्रशिक्षण के साथ हुआ। वीरांगनाओं ने उत्साहपूर्वक योग, व्यायाम व अनुशासनात्मक गतिविधियों में सहभागिता कर अपने शारीरिक एवं मानसिक विकास का अभ्यास किया।
यज्ञ में प्रवचन करते हुए आचार्य कर्मवीर ने कहा कि यज्ञ वेदों द्वारा निर्देशित मानव जीवन का श्रेष्ठतम कर्म है। महर्षि दयानन्द सरस्वती के सिद्धांतों के अनुसार यज्ञ केवल अग्नि में सामग्री अर्पित करने का कर्म नहीं, अपितु ईश्वर की उपासना, पर्यावरण की शुद्धि, उत्तम विचारों का संवर्धन तथा समाज के कल्याण का महान साधन है।
उन्होंने कहा कि यज्ञ मनुष्य को परोपकार, अनुशासन, संयम एवं कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है। वेदों में यज्ञ को लोक कल्याण, स्वास्थ्य संवर्धन तथा आध्यात्मिक उन्नति का आधार माना गया है।बौद्धिक सत्र में श्रीकृष्ण के आदर्श जीवन पर हुआ चिंतन किया गया।
बौद्धिक सत्र में डॉ. आयुषी राणा भारती ने वीरांगनाओं को श्रीकृष्ण के जीवन एवं व्यक्तित्व के विषय में वैदिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा प्रतिपादित वैदिक सिद्धांतों के अनुसार श्रीकृष्ण एक महान, विद्वान, पराक्रमी एवं धर्मनिष्ठ पुरुष थे।
इस अवसर पर श्वेता, पूनम, संगीता, सीट्टो, रितु, सृष्टि, निधि, विधि, सोनम, पूनम, वंदना, करुणा, नरेशना, रहती देवी, अरुणा, रीता, सुनीता, सुलक्षा, ओमवीर आर्य, राजवीर सिंह, महाशय विनोद आर्य, विकास आर्य, विजयपाल आर्य, गौरव आर्य, लक्ष्य, वैदिक, हर्ष आर्य, वेदिका, सोनिया, केशव, धर्मवीर, विपिन, अजब सिंह, डॉ. महावीर, हेमंत, डॉ. सुरेन्द्र, जगबीर, प्रमिल, रमेश आर्य, अनुज, अजय, महेश आदि उपस्थित रहे
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़