राजगढ़ ब्यूरो चीफ संतोष गोस्वामी
राजगढ़ जिले में आबकारी विभाग की नाक के नीचे सरकारी नियमों को किस तरह ठेंगे पर रखा जाता है, आज इसका एक बड़ा खुलासा हम करने जा रहे हैं। शासन बदलता है, नियम बदलते हैं, लेकिन नहीं बदलती तो शराब ठेकेदारों की मनमानी!
मामला राजगढ़ जिले के कुरावर शासकीय शराब ठेके और तीनोनिया जोड़ ठेके का है, जहाँ इस वक्त ‘ओवररेटिंग’ का खेल पूरे चरम पर है। यहाँ सरकार के तय दामों का कोई मोल नहीं है, बल्कि ठेकेदारों के अपने खुद के मनमाने दाम चल रहे हैं।
नियम के मुताबिक, हर शासकीय शराब दुकान के बाहर एक स्पष्ट रेट लिस्ट (मूल्य सूची) टंगी होनी चाहिए, ताकि जनता को पता रहे कि सरकार ने किस ब्रांड की क्या कीमत तय की है। लेकिन कुरावर और तीनोनिया जोड़ के इन ठेकों पर आपको ढूंढने से भी रेट लिस्ट नजर नहीं आएगी। जानबूझकर रेट लिस्ट को गायब रखा गया है, ताकि हर बोतल पर अपनी मर्जी से ₹20, ₹30 से लेकर ₹50 तक ज्यादा वसूले जा सकें।
जब कोई जागरूक नागरिक या ग्राहक इसका विरोध करता है या रेट लिस्ट मांगता है, तो ठेके के करिंदे सीधे मुंह बात नहीं करते। उल्टे ग्राहकों से बदतमीजी की जाती है।
सवाल नंबर 1: कुरावर और तीनोनिया जोड़ ठेके से रेट लिस्ट क्यों गायब है? आबकारी विभाग मौन क्यों है?
सवाल नंबर 2: प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा पैसे वसूलने का अधिकार इन ठेकेदारों को किसने दिया?
सवाल नंबर 3: क्या राजगढ़ का जिला प्रशासन और आबकारी अमला इन ठेकों पर सिर्फ कागजी कार्रवाई करता है या फिर इस अंधेरगर्दी में उनकी भी मूक सहमति है?
यह सीधे-सीधे जनता की जेब पर डाका है और शासन के राजस्व नियमों का खुला उल्लंघन है। एक तरफ आम जनता से जुड़े हर छोटे मामले पर मुस्तैद रहने वाला प्रशासन, इन रसूखदार शराब ठेकेदारों के सामने आखिर इतना बेबस क्यों नजर आता है?
राजगढ़ कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी कुरावर और तीनोनिया जोड़ के इन ठेकों पर जांच की जाएगी? क्या इन मनमाने दामों को वसूलने वालों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह अवैध वसूली ऐसे ही धड़ल्ले से जारी रहेगी?