बालेश्वर जिले के बस्ता ब्लॉक के संतोषपुर पंचायत अंतर्गत थेंगिड़िया गांव में श्मशान भूमि को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घरों के समीप शवदाह कराने के बजाय श्मशान के लिए अधिग्रहित 2 एकड़ 20 डिसिमिल भूमि का उपयोग किया जाए।जानकारी के अनुसार, सरकारी भूमि पर पिछले कई वर्षों से 13 ग्रामीण दुकानें चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इसी भूमि को श्मशान बताते हुए कुछ ग्रामीण न्यायालय पहुंचे थे। इसके बाद न्यायालय के निर्देशों के चलते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई फिलहाल स्थगित है।लगातार हो रही बारिश को देखते हुए दुकानदारों ने प्रशासन से फिलहाल बेदखली की कार्रवाई टालने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि श्मशान के लिए पहले से अधिग्रहित 2 एकड़ 20 डिसिमिल भूमि उपलब्ध है, इसलिए उसी स्थान पर अंतिम संस्कार कराया जाना चाहिए, न कि आबादी और घरों के बिल्कुल पास ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण अधिग्रहित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड अब तक परिवर्तित नहीं किया गया है, जिससे वह जमीन आज भी पूर्व मालिक के कब्जे में है।वहीं, समीप स्थित प्लॉट संख्या 299 (नयन जोरी) से अतिक्रमण हटाने के लिए वर्ष 2025 में न्यायालय ने निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक उन निर्देशों का पालन नहीं हुआ। श्मशान भूमि और अतिक्रमण के मामले को लेकर दोनों पक्ष न्यायालय का सहारा ले रहे हैं, जिससे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।दुकानदारों ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से मांग की है कि गांव की सभी विवादित सरकारी जमीनों का सीमांकन (डिमार्केशन) कराया जाए तथा दोनों स्थानों से अतिक्रमण हटाया जाए। साथ ही, घरों के समीप शवदाह बंद कर अधिग्रहित श्मशान भूमि पर ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अनिश्चितकालीन धरना और अनशन शुरू करेंगे।
रिपोर्ट: ज्योतिरंजन पट्टायत, बालेश्वर।
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