रायरंगपुर, ओडिशा: देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में शामिल सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों का शिकार करने की एक बड़ी साजिश को वन विभाग ने समय रहते विफल कर दिया है। शिकार के उद्देश्य से अभयारण्य में अवैध रूप से प्रवेश कर रहे चार शिकारियों को वन विभाग और सिमिलीपाल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के पास से दो देसी हथियार, बारूद, हेड टॉर्च और अन्य घातक शिकार सामग्री बरामद की गई है।सिमिलीपाल टाइगर संरक्षण परियोजना (दक्षिण) के उपनिदेशक सुमित कुमार कर ने बताया कि यह कार्रवाई आधुनिक TrailGuard AI कैमरा प्रणाली की मदद से संभव हो सकी। जंगल में लगाए गए एआई आधारित कैमरों ने जैसे ही संदिग्ध गतिविधि दर्ज की, तुरंत वन विभाग को अलर्ट मिला। सूचना मिलते ही विशेष टीम मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर चारों आरोपियों को पकड़ लिया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मयूरभंज जिले के काप्तीपदा थाना क्षेत्र के बड़ाजुनपाल गांव निवासी फागुराम टुडू (23), रामचंद्र किस्कू (56), रंजन किस्कू (26) तथा सानजुनपाल गांव के विश्वनाथ हांसदा (65) के रूप में हुई है।वन विभाग ने आरोपियों के कब्जे से दो देसी हाथ से बनी बंदूकें, बंदूक का बारूद, दो हेड टॉर्च, धारदार हथियार तथा शिकार में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी जंगल के भीतर वन्यजीवों का शिकार करने की नीयत से प्रवेश कर रहे थे।इस मामले में पोड़ाडीहा वन्यजीव रेंज में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।वन विभाग का कहना है कि समय पर मिली सूचना और त्वरित कार्रवाई के कारण वन्यजीवों का संभावित शिकार रोका जा सका। अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संबंध किसी बड़े शिकार गिरोह से तो नहीं है। सिमिलीपाल में अत्याधुनिक तकनीक और सतर्क निगरानी के कारण वन्यजीव संरक्षण को लगातार मजबूती मिल रही है।