*प्रधानमंत्री के सपनों को धराशाई करता डिंडोरी जिला प्रशासन ? अमृत सरोवर के नाम बनवा रहा चेक डैम स्टॉप डेम*
डिंडौरी अमृत सरोवर मिशन के अंतर्गत जिले में युद्ध स्तर पर स्टॉपडेम और चेकडेमो का निर्माण कार्य आरईएस विभाग के द्वारा कराया जा रहा है l इस योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों की स्वीकृति कलेक्टर द्वारा दी गई है l कार्यों की स्वीकृति आदेश में कलेक्टर के हस्ताक्षर हैं कलेक्टर के हस्ताक्षर से जारी प्रशासकीय स्वीकृति आदेशों को देखकर तो ऐसा लगता है मानो इस तरह के निर्माण कार्य जानबूझकर पूरी योजनाबद्ध तरीके से कराए जा रहे हैं l अमृत सरोवर योजना और उसके अंतर्गत कराए जाने वाले कार्य और स्वीकृत कार्यों की स्थिति देखकर ऐसा भी प्रतीत होता है कि जिले के कलेक्टर को न प्रधानमंत्री की इस अति महत्वपूर्ण योजना की चिंता है और न ही कार्यों की उपयोगिता की ही चिंता है l स्वीकृत निर्माण कार्यों की स्थिति देखकर लोग भी कहने लगे हैं कि प्रधानमंत्री के अमृत सरोवर अभियान से बरसने वाला अमृत लोगों को मिले या न मिले अधिकारियों में इस अमृत को पीने की होड़ लगी हुई है l जल्दबाजी में अधिकारियों ने ऐसे-ऐसे स्थलों में करोड़ो रूपये के निर्माण कार्य स्वीकृत कर निर्माण कार्य प्रारंभ किया हैं जिनके निर्माण से न तो जल संवर्धन होगा और न ही स्थानीय जनो कोई लाभ होगा..? कोविड संक्रमण के दौरान विगत वर्षों में हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा विभागीय अमले ने आपदा में अवसर तलाशने की तर्ज पर अमृत सरोवर के तहत तालाब निर्माण की जगह सैकड़ो की संख्या में स्टापडेम और चेकडेमो कि धड़ाधड़ स्वीकृति कर काम शुरू करा दिया गया है, अधिकारियों को यह भी समझ नहीं आया कि अमृत सरोवर जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि सरोवरो का निर्माण कार्य कराया जाना है, अमृत सरोवर के नाम पर बड़े पैमाने पर स्टापडेम और चेकडेम स्वीकृत किया गया है, जिले में जिस तरह से तमाम निर्माण कार्यो में तकनीकी मापदण्डो को ठेंगा दिखाते हुए बेरोकटोक घटिया निर्माण करा सामग्री खरीदी में भंडार क्रय अधिनियम को दरकिनार करते हुए सप्लायरों के आड़ में प्रशासन चांदी काटने में लगा हुआ है l

अमृत सरोवर मिशन के पीछे केंद्र सरकार की यह है मंशा आजादी के 75 वी वर्षगांठ पूरे होने पर अमृत महोत्सव का शुभारंभ किया गया है, इस पल को गाँव गाँव तक मे यादगार बनाने के लिए प्रत्येक जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य कराया जाना था,जिसमे प्रत्येक तालाब में कम से कम 10000 घनमीटर जल धारण की क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। उक्त अमृत सरोवरों को दर्शनीय स्थलों के तौर पर विकसित करने का उद्देश्य भी शामिल हैं, समस्त अमृत सरोवरो में राष्ट्रीय ध्वजारोहण कर पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पण किया जाना प्रस्तावित है ।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास के प्रमुख सचिव ने क्यों किया पत्र जारी ? पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने 25 मई को अमृत सरोवर के तहत कराये जा रहे निर्माण कार्यो को लेकर एक पत्र जारी किया हैं, जिससे विभाग में अफरा तफरी का माहौल है, अमृत सरोवर के तहत सैकड़ो की संख्या में निर्माण कार्य स्वीकृत किये गए है जिसमे से महज तालाबों की संख्या महज 29 हैं, शेष कार्य स्टॉपडेम और चेकडेम हैं। पत्र में उल्लेख है कि भारत सरकार द्वारा सिर्फ तालाबों को ही अमृत सरोवर के रूप में मान्य किया गया है, अमृत सरोवर के तहत संरचनाओं में चेकडेम/स्टापडेम शामिल है तो उन्हें अमृत सरोवर की सूची से पृथक करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद जिले के विभागीय अधिकारी नए सिरे से कार्य स्थलों के निरीक्षण में जुट गए हैं। प्रमुख सचिव के द्वारा पत्र जारी करने के बाद जनचर्चा हैं कि केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर मिशन के क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर लापरवाही बरती गई है, बरती गई लापरवाही को लेकर किसकी जिम्मेदारी तय होगी यह आने वाले दिनों में तय होगा या नही साफ हो जाएगा।