राजगढ़ ब्यूरो चीफ संतोष गोस्वामी
नरसिंहगढ़ के मुख्य मछली मार्केट से… जहाँ कानून और लोगों की सेहत की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस थाई मांगुर (अफ्रीकी कैटफिश) को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और भारत सरकार ने साल 2000 से पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है, वही जानलेवा मछली आज नरसिंहगढ़ के बाजारों में बिना किसी खौफ के बेची जा रही है। आखिर किसकी शह पर चल रहा है यह अवैध और सेहत से खिलवाड़ करने वाला काला कारोबार?
नरसिंहगढ़ के मछली बाजार में हर सुबह प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की आवक आसानी से देखी जा सकती है। सस्ती कीमत और तेजी से वजन बढ़ने के लालच में कारोबारी इसे भारी मात्रा में अवैध रूप से ला रहे हैं। यह मछली सीवेज के गंदे पानी और सड़े-गले अवशेषों को खाकर तेजी से बढ़ती है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के अनुसार, इसके सेवन से शरीर में भारी धातुएं और खतरनाक केमिकल्स प्रवेश करते हैं, जिससे कैंसर, त्वचा रोग और लिवर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सख्त निर्देशों और मत्स्य पालन विभाग के स्पष्ट नियमों के बावजूद, स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग और मत्स्य विभाग की आंखों के सामने यह धंधा फल-फूल रहा है।
पहला सवाल: जब प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस और मत्स्य विभाग गाड़ियों को पकड़कर हजारों किलो थाई मांगुर नष्ट कर रहे हैं, तो नरसिंहगढ़ में चेकिंग अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा?
दूसरा सवाल: क्या स्थानीय अधिकारियों को इस अवैध बिक्री की भनक तक नहीं है, या फिर यह पूरा खेल साठ-गांठ और संरक्षण में चल रहा है?
“थाई मांगुर केवल इंसानी सेहत के लिए ही खतरनाक नहीं है, बल्कि यह हमारे स्थानीय जलाशयों और देसी मछलियों की प्रजातियों को भी खाकर खत्म कर देती है। जनता की सेहत और पर्यावरण दोनों खतरे में हैं। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद नरसिंहगढ़ प्रशासन नींद से जागता है और इस अवैध काले कारोबार पर शिकंजा कसता है, या फिर यह धंधा यूं ही बेखौफ चलता रहेगा।