बांसवाड़ा।
जिले में गुरुवार को जनसेवा और कृषि क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए। विकसित भारत जनसेवा अभियान के तहत जिले के 7 चिकित्सा संस्थानों में रक्तदान शिविर लगाए गए, जहां कुल 130 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। वहीं, बागीदौरा क्षेत्र के वडलीपाड़ा में गो आधारित प्राकृतिक खेती, कृषि विकास और महिला सशक्तीकरण को लेकर कृषि गोष्ठी एवं महिला प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ।
7 चिकित्सा संस्थानों में 130 यूनिट रक्तदान
विकसित भारत जनसेवा अभियान के तहत उपजिला चिकित्सालय आनंदपुरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अरथुना, उपजिला चिकित्सालय बागीदौरा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छोटी सरवन, छोटी सरवा-कुशलगढ़, सुरवानिया-तलवाड़ा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोर-परतापुर में रक्तदान शिविर आयोजित किए गए।
सभी शिविरों में लोगों ने स्वैच्छिक रूप से रक्तदान किया और कुल 130 यूनिट रक्तदान हुआ। शिविरों में रक्तदाताओं को रक्तदान के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही संकल्प-पत्र भरवाकर रक्तदान के लिए शपथ भी दिलाई गई।
चिकित्सा विभाग की ओर से बताया गया कि रक्तदान का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आमजन में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
ई-रक्तकोष पोर्टल पर अपलोड किया गया रिकॉर्ड
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भरतराम मीणा ने बताया कि अभियान के तहत आयोजित रक्तदान शिविरों की पारदर्शिता और रिकॉर्ड संधारण के लिए शिविरों के फोटो और वीडियो ई-रक्तकोष तथा जनसेवा अभियान पोर्टल पर अपलोड किए गए।
शिविर समाप्त होने के बाद रक्त संग्रहण से संबंधित जानकारी कार्यालय को भेजना भी अनिवार्य किया गया था।
सुरवानिया में महिला कार्मिकों और वरिष्ठ नागरिकों ने लिया हिस्सा
सुरवानिया में आयोजित रक्तदान शिविर के दौरान चिकित्सा विभाग की महिला कार्मिकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। इसके अलावा जिले के कई वरिष्ठ नागरिकों ने भी रक्तदान में भाग लेकर लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया।
प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
इसी बीच बागीदौरा के वडलीपाड़ा में गो आधारित प्राकृतिक खेती, कृषि विकास और महिला प्रोत्साहन को लेकर कृषि गोष्ठी एवं महिला प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने भाग लिया और किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कलेक्टर ने कहा कि गो आधारित प्राकृतिक खेती किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है। इसमें स्थानीय संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जा सकता है और खेती में नई तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि महिलाएं खेती के साथ-साथ पशुपालन, जैविक उत्पाद तैयार करने और दूसरी आजीविका गतिविधियों में भी योगदान दे रही हैं।
उन्होंने महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने तथा कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कृषि विशेषज्ञों और बड़ी संख्या में महिला किसानों की मौजूदगी
कृषि गोष्ठी के दौरान गो आधारित प्राकृतिक खेती, कृषि विकास और महिला सशक्तीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती के संभावित लाभों और कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के संबंध में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के उप निदेशक कैलाशचन्द्र मीणा, काश्तकार रणछोड़ पाटीदार, संबंधित विभागीय अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ, महिला प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिला किसान मौजूद रहीं।
कुल मिलाकर बांसवाड़ा में एक ओर जनसेवा अभियान के तहत स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा दिया गया, वहीं दूसरी ओर किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने और महिलाओं को कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।