शिक्षक समाज और राष्ट्र के दिशा तय करते है- डॉ भारती सिंह
ज्ञानारंभ समारोह में नवप्रवेशी बी.एड. विद्यार्थियों को आदर्श शिक्षक बनने की दी गई प्रेरणा
सुलतानपुर। राणा प्रताप पी.जी. कॉलेज के स्वामी विवेकानंद सभागार में शनिवार को बी.एड. प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए “ज्ञानारंभ समारोह” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शिक्षक-प्रशिक्षण की महत्ता, शिक्षक की सामाजिक भूमिका तथा शैक्षणिक जीवन के प्रति जिम्मेदारियों से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके पश्चात सपना पाण्डेय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संतोष अंश ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि बी.एड. में प्रवेश केवल एक डिग्री प्राप्त करने की शुरुआत नहीं, बल्कि विद्यार्थी से शिक्षक और ज्ञान से संस्कार की ओर बढ़ने वाली यात्रा का आरंभ है। शिक्षक केवल विषय का अध्यापन नहीं करता, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और जीवन को दिशा देता है। आज बी एड के प्रशिक्षु शिक्षक बनने की तैयारी के लिए ज्ञान ग्रहण कर रहे हैं, जबकि भविष्य में उन्हें किसी विद्यार्थी के जीवन में ज्ञान, संस्कार और प्रेरणा का प्रकाश बनना है। शिक्षक बनना केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक पीढ़ी के निर्माण की जिम्मेदारी स्वीकार करना है। समारोह में महाविद्यालय के अध्यक्ष संजय सिंह ‘एडवोकेट’, प्रबंधक बालचंद्र सिंह ‘एडवोकेट’, उप प्राचार्या एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. निशा सिंह, बी.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. भारती सिंह, मैडम शांतिलता कुमारी तथा डॉ. सीमा सिंह, डॉ संतोष अंश का अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर शिक्षक दिवस पर स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अनुपस्थित रहीं उप प्राचार्या प्रो. डॉ. निशा सिंह को शिक्षक दिवस सम्मान भी प्रदान किया गया। अध्यक्ष संजय सिंह ‘एडवोकेट’ ने उन्हें सम्मानित किया।
बी.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. भारती सिंह ने विद्यार्थियों को शिक्षक-प्रशिक्षण के उद्देश्य, पाठ्यक्रम तथा शैक्षणिक अनुशासन के संबंध में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के दिशा तय करते है। उप प्राचार्या एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. निशा सिंह ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शिक्षा, भाषा, व्यक्तित्व विकास और निरंतर अध्ययन के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति संस्कार के रूप में परिलक्षित होती है। शिक्षा का लक्ष्य हृदय की विशालता से है।
समारोह में महाविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी सत्यम त्रिपाठी ने अपने बी.एड. जीवन एवं शिक्षक बनने की यात्रा के अनुभव साझा किए। पूर्व छात्रा एवं शिक्षिका अंशिका सिंह ने भी अपने अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षक-प्रशिक्षण के दौरान ज्ञान, कौशल एवं व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। पूर्व छात्रा शिवानी, जिनका एल.टी. ग्रेड शिक्षक भर्ती की मेन्स परीक्षा के लिए चयन हुआ है, ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के संबंध में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। पूर्व छात्र छोटेलाल मौर्य ने पद्य में अपने भाव को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रबंधक बालचंद्र सिंह ‘एडवोकेट’ ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को आशीर्वचन देते हुए विद्यार्थियों को शैक्षणिक जीवन में अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। मुख्य अतिथि और महाविद्यालय के अध्यक्ष संजय सिंह ‘एडवोकेट’ ने अपने प्रेरक उद्बोधन में विद्यार्थियों को शिक्षक के दायित्व और समाज में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थी को शिखर तक ले जाता है। शिक्षक समाज और राष्ट्र के लिये योग्य पीढ़ी तैयार करता है। आज विद्यार्थी परिसर से विमुख हो है है, वे ज्ञान के मूल भाव को नहीं समझ पाते है। विद्यार्थी का परिसर में रहकर ही चौमुखी विकास होता है।
समारोह के अंत में डॉ. सीमा सिंह ने आभार ज्ञापित किया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।