सहारनपुर
रामपुर मनिहारान। जैन समाज द्वारा आयोजित दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व के छठवे दिन उत्तम संयम धर्म को श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म की आराधना करते हुए संयमित जीवन जीने का का संकल्प लिया।
बड़े जैन मंदिर में आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज के सानिध्य में प्रातःकाल श्री पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। इसके पश्चात नित्य नियम पूजा-अर्चना के साथ श्री दशलक्षण महामंडल विधान का विधिवत आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से श्री पार्श्वनाथ भगवान की पूजा-अर्चना की।
दशलक्षण महापर्व में नगर में विराजमान आचार्य श्री भारत भूषण जी महाराज इन दिनों कठिन साधना कर रहे हैं। वह आहार में केवल दलिया और एक दाल ही ले रहे हैं। इसके अलावा और कुछ भी नहीं। उनकी आहार चर्या देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इसके बाद सुगंध दशमी महापर्व की सामूहिक पूजा की गई। बैंड बाजे के साथ नगर के तीनों जैन मंदिर में धूप खेई गई।
सायंकाल श्रीजी की भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आरती के पश्चात धार्मिक प्रतियोगिता मै कौन हूं का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 भारत भूषण जी महाराज ने उत्तम संयम धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि संयम का अर्थ है अपनी इन्द्रियों को वश में रखना।
जैन धर्म के दशलक्षण धर्म में यह छठवां धर्म है।
इसका अर्थ है—मन, वचन और शरीर पर संयम रखते हुए जीवों के प्रति अहिंसा और आत्म-संयम का पालन करना।
उत्तम संयम धर्म की भावना
इंद्रियों और मन को वश में रखकर, किसी भी जीव को कष्ट न देना और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलना ही उत्तम संयम है।
दशलक्षण महापर्व के इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ लिया और भगवान के मोक्ष कल्याणक एवं उत्तम संयम धर्म की आराधना के माध्यम से आत्मकल्याण की भावना को मजबूत किया
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़