रामपुर।
मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वां बेटियों तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के आधार बनवाने में बायोमीट्रिक तकनीक के कारण कई वर्षों से परेशानी आ रही थी। दोनों बहनों के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों के बायोमीट्रिक डेटा में समानता के चलते सिस्टम दूसरी बच्ची को अलग व्यक्ति के रूप में पहचान नहीं पा रहा था।
एक बच्ची का आधार बनने के बाद दूसरी बच्ची का नामांकन कराने पर सिस्टम उसके बायोमीट्रिक डेटा को पहले से दर्ज डेटा से मिलता-जुलता बताकर आवेदन को डुप्लीकेट के रूप में रोक देता था। परिवार की ओर से स्थानीय स्तर पर कई प्रयास किए गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
मामला जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के संज्ञान में पहुंचने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। डीएम ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) से संपर्क कर तकनीकी समाधान के लिए प्रयास किया। इसके बाद UIDAI मुख्यालय, नई दिल्ली की ओर से विशेष तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से दोनों बच्चियों के अलग-अलग आधार बनाने की व्यवस्था की गई।
समाधान के बाद तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर दोनों के अलग-अलग आधार कार्ड जारी हो गए। इससे परिवार को बड़ी राहत मिली। आधार न होने के कारण बच्चियों के स्कूल प्रवेश और सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों में भी परेशानी आ रही थी।
यह मामला जुड़वां बच्चों के बायोमीट्रिक पंजीकरण में आने वाली तकनीकी चुनौतियों का उदाहरण है, जिनके समाधान के लिए UIDAI की विशेष प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।