बारीपदा, 30/09: शिमिलिपाल राष्ट्रीय उद्यान की तलहटी में कथित अवैध पत्थर खनन और विस्फोट किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने रिपोर्ट तलब की है। सामाखुंटा तहसील के अंतर्गत केंदुआ पंचायत के शरतचंद्रपुर और बांक्साही गांव के समीप कथित रूप से अवैध पत्थर खनन एवं विस्फोट के कारण ग्रामीणों के जीवन और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायत आयोग के समक्ष की गई थी।शिकायत के अनुसार, रात के समय ड्रिलिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है तथा विस्फोटकों के जरिए पत्थर तोड़े जाते हैं। इससे क्षेत्र में तेज आवाज और कंपन उत्पन्न होने के साथ कई मिट्टी के मकानों में दरारें आने का आरोप लगाया गया है। विस्फोटों के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल होने की बात भी शिकायत में कही गई है।शिकायतकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इस स्थिति से अधिक प्रभावित हो रहे हैं। आवश्यक अनुमति एवं पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना पत्थर खनन किए जाने तथा प्रतिदिन 50 से अधिक ट्रकों में पत्थर परिवहन किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इससे ग्रामीण सड़कों और सामान्य जनजीवन के प्रभावित होने की बात कही गई है।वहीं, पत्थर खनन के कारण शिमिलिपाल की तलहटी के पर्यावरण और जैव विविधता पर भी असर पड़ने का आरोप लगाया गया है। पहाड़ों की कटाई, पत्थर उत्खनन, विस्फोट और भारी वाहनों की आवाजाही से ध्वनि एवं वायु प्रदूषण बढ़ने की शिकायत की गई है।मामले की जांच कर कथित अवैध पत्थर खनन से संबंधित तथ्यों का सत्यापन करने तथा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश NHRC की ओर से मयूरभंज जिलाधिकारी को दिए जाने की जानकारी मिली है।शिकायतकर्ता की ओर से अवैध पत्थर खनन तत्काल बंद कराने, खनन में इस्तेमाल किए जा रहे मशीनरी एवं वाहनों को जब्त करने, दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करने तथा प्रभावित परिवारों को अंतरिम मुआवजा प्रदान करने की मांग भी NHRC के समक्ष रखी गई है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रह्राज।