दमोह (मध्य प्रदेश)।
जिले के राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई जानकारी के अनुसार, जिले के सभी छह राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। इसके बाद तहसीलदार दमयंती नगर और तत्कालीन रीडर प्रियांश बोहरे को निलंबित किया गया, जबकि सौरव गंधर्व एसडीएम दमोह को पद से हटाकर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
छह राजस्व न्यायालयों की फाइलों की हुई जांच
कलेक्टर ने बताया कि निरीक्षण का उद्देश्य आम नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना तथा नामांतरण, बंटवारा और अन्य राजस्व प्रकरणों का समय-सीमा में पारदर्शी एवं नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित करना था। इसी उद्देश्य से जिले के सभी छह राजस्व न्यायालयों के प्रकरणों और संबंधित अभिलेखों की जांच कराई गई।
अधिकारिता और सुनवाई की प्रक्रिया में मिलीं खामियां
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कलेक्टर के अनुसार, जांच के दौरान कुछ मामलों में अधिकारियों द्वारा अधिकारिता से बाहर जाकर आदेश पारित करने, आवेदकों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिए बिना प्रकरण खारिज करने तथा जुर्माने की राशि जमा कराए बिना प्रकरणों को नस्तीबद्ध करने जैसी अनियमितताएं सामने आईं। इन मामलों में शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, तहसीलदार दमयंती नगर और तत्कालीन रीडर प्रियांश बोहरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। सौरव गंधर्व एसडीएम दमोह को उनके पद से हटाते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अतिरिक्त सात अन्य अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। उनके जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक व्यवस्था में किए गए बदलाव
राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए संजय दुबे को एसडीएम दमोह का प्रभार सौंपे जाने की जानकारी दी गई। वहीं, दमयंती नगर में पदस्थ चतुर्वेदी को तहसीलदार का प्रभार दिया गया है।
आम नागरिकों के काम समय पर करने के निर्देश
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को आमजन की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और नियमानुसार निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को राहत देना और शासन की जनकल्याणकारी मंशा को धरातल पर लागू करना है। जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजस्व न्यायालयों में हुई इस कार्रवाई के बाद अब आम नागरिकों की नजर इस बात पर रहेगी कि लंबित प्रकरणों का निराकरण कितनी तेजी से होता है और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।दमोह, मध्य प्रदेश से रिपोर्टर राज पाठक की रिपोर्ट।