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सीधी। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को जिला चिकित्सालय सीधी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में गर्भवती एवं प्रसवोत्तर महिलाओं तथा किशोर-किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. दीपा रानी इसरानी ने हितग्राहियों को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर पोषण, व्यवहार, पारिवारिक वातावरण और घरेलू हिंसा का गहरा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं की भावनात्मक एवं मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और जरूरतमंदों को उचित सहयोग प्रदान करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य का व्यक्ति के व्यवहार, पारिवारिक संबंधों और दैनिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
विशेष रूप से गर्भवती एवं प्रसवोत्तर महिलाओं के साथ किशोर-किशोरियों की मानसिक समस्याओं को समझना आवश्यक है।
उनकी बातों को गंभीरता से सुनना, भावनाओं का सम्मान करना और उन्हें सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उन्हें समझने और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की जरूरत है।
परिवार का सहयोग, सकारात्मक व्यवहार और संवेदनशील दृष्टिकोण मानसिक रूप से स्वस्थ समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा महिलाओं और किशोर-किशोरियों की समस्याओं को संवेदनशीलता से समझने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. रवि पटेल, डॉ. सुनीता तिवारी, डॉ. प्रभा तिवारी, डॉ. अंकित सिंह, डॉ. अरविंद सोनी, डॉ. हिमेश पाठक, डॉ. अरविंद, डॉ. सत्येंद्र, डॉ. माधुरी, साइकोलॉजिस्ट ज्योति मिश्रा, नर्सिंग ट्यूटर प्रीति, नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं तथा बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित रहे।