मुरुड ग्राम पंचायत में हलचल! आठ सदस्यों ने की जाँच की माँग; उपसरपंच बोले—आरोप निराधार!
सरपंच, उपसरपंच सहित अधिकारियों के कामकाज की जाँच की माँग; 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन की चेतावनी
मुरुड, प्रतिनिधि। ग्राम पंचायत के कामकाज में कथित अनियमितताओं को लेकर मुरुड में राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गरमा गया है। सरपंच, उपसरपंच और संबंधित अधिकारियों के कामकाज की विस्तृत जाँच कराने की माँग को लेकर आठ ग्राम पंचायत सदस्यों ने जिला परिषद प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। आर्थिक लेन-देन, पंद्रहवें वित्त आयोग के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों, ग्रामसभा और मासिक बैठकों के आयोजन तथा सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। सदस्यों ने चेतावनी दी है कि उनकी माँगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वे 13 अक्टूबर 2026 से ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे।
वहीं, इस मामले में उपसरपंच वैभव सापसोड ने अपना पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि पंद्रहवें वित्त आयोग के माध्यम से गाँव में बड़े पैमाने पर विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं और इन कार्यों को लेकर लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच अब प्रशासन की भूमिका पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
आर्थिक लेन-देन से लेकर विकास कार्यों तक पर सवाल
ग्राम पंचायत के आठ सदस्यों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई मुद्दे उठाए गए हैं। सदस्यों का आरोप है कि नियमित रूप से ग्रामसभाएँ आयोजित नहीं की जा रही हैं और मासिक बैठकों के आयोजन में भी अनियमितता बरती जा रही है। इसके अलावा नकद राशि के खर्च में कथित गड़बड़ी, ई-निविदा प्रक्रिया अपनाए बिना बड़े पैमाने पर खर्च किए जाने और पंद्रहवें वित्त आयोग के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों में मनमानी किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सदस्यों ने ग्राम पंचायत निधि की राशि को विभिन्न योजनाओं के खातों में जमा करने से संबंधित लेन-देन की भी जाँच कराने की माँग की है। उनका कहना है कि सभी मामलों की जाँच संबंधित दस्तावेजों, आर्थिक अभिलेखों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, उपसरपंच वैभव सापसोड ने गाँव में विकास कार्य जारी होने का हवाला देते हुए आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में संबंधित कार्यों की मंजूरी, खर्च और वास्तविक स्थिति की जाँच के बाद ही मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
बकरी बाजार, पशु बाजार और अनाज बाजार के लेन-देन की जाँच की माँग
मुरुड के बकरी बाजार, पशु बाजार और अनाज बाजार से होने वाली आय का मुद्दा भी सदस्यों ने उठाया है। इन बाजारों से प्राप्त राजस्व, जमा की गई राशि, संबंधित प्रविष्टियों और आर्थिक अभिलेखों की जाँच कराने की माँग की गई है।
इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत कर्मचारियों को दी गई कर रसीदों और कर वसूली से संबंधित लेन-देन का सत्यापन करने की माँग भी ज्ञापन में की गई है।
इन माँगों के बाद ग्राम पंचायत के राजस्व संग्रह और आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता का मुद्दा चर्चा में आ गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन मामलों की जाँच किस प्रकार करता है।
सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
ग्राम पंचायत के चेक, चेकबुक, आर्थिक अभिलेख, रजिस्टर, कार्यवाही पुस्तिकाएँ, भुगतान संबंधी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कागजात कार्यालय में सुरक्षित रखने के बजाय निजी निवास पर ले जाए जाने का आरोप भी सदस्यों ने लगाया है।
सदस्यों ने माँग की है कि इन आरोपों की जाँच कर संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता, सुरक्षा और उनके उपयोग की पड़ताल की जाए।
हालाँकि, इस संबंध में अभी तक किसी आधिकारिक जाँच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों की जाँच और प्रशासनिक पड़ताल के बाद ही किया जा सकता है।
सदस्यों और नागरिकों के साथ व्यवहार पर भी शिकायतें
ज्ञापन में ग्राम पंचायत के कामकाज में कथित हस्तक्षेप तथा ग्राम पंचायत सदस्यों और नागरिकों के साथ अनुचित व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। इसके साथ ही गाँव के दैनिक कामकाज और नागरिकों की समस्याओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
स्थानीय स्वशासन संस्था का कामकाज नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से चलना अपेक्षित है। ऐसे में स्वयं ग्राम पंचायत सदस्यों द्वारा जाँच की माँग किए जाने से यह मामला महत्वपूर्ण हो गया है।
प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि ज्ञापन में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे की निष्पक्ष जाँच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
उपसरपंच वैभव सापसोड ने आरोपों को किया खारिज
इस मामले में उपसरपंच वैभव सापसोड से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि पंद्रहवें वित्त आयोग के माध्यम से गाँव में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ ग्राम पंचायत सदस्यों ने इन कार्यों की जाँच कराने की माँग की है, लेकिन विकास कार्यों को लेकर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
उपसरपंच द्वारा आरोपों को खारिज किए जाने के बाद अब शिकायतकर्ता सदस्यों के दावों और उनके पक्ष के बीच उठे सवालों की निष्पक्ष जाँच महत्वपूर्ण हो गई है।
संबंधित विकास कार्यों के दस्तावेज, खर्च का विवरण, स्वीकृति आदेश और मौके पर किए गए कार्यों की स्थिति की जाँच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
जिला परिषद प्रशासन की भूमिका पर निगाहें
सदस्यों के अनुसार, इस मामले में जिला परिषद, लातूर के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (पंचायत विभाग) को ज्ञापन सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायत समिति और लातूर के पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन दिए जाने की जानकारी दी गई है।
ज्ञापन पर ग्राम पंचायत सदस्य मेघराज अंधारे, तिलोत्तमा गाडे, लताबाई भोसले, सूरज सूर्यवंशी, पल्लवी घोडके, वैशाली काले और फुलाबाई ईटकर के हस्ताक्षर होने की जानकारी दी गई है।
सदस्यों ने चेतावनी दी है कि उनकी माँगों पर कार्रवाई नहीं होने पर वे 13 अक्टूबर 2026 से ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला परिषद प्रशासन शिकायतों पर संज्ञान लेकर जाँच शुरू करता है या नहीं। साथ ही, संबंधित सरकारी अभिलेखों की जाँच और अनशन को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर भी मुरुड के नागरिकों की निगाहें टिकी हुई हैं।
निष्पक्ष जाँच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
मुरुड ग्राम पंचायत के कामकाज को लेकर उठाए गए सवालों ने स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। एक ओर आठ सदस्य विभिन्न मामलों की जाँच की माँग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर उपसरपंच ने आरोपों को निराधार बताया है।
ऐसी स्थिति में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले शिकायत में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे की निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। प्रशासनिक जाँच, सरकारी दस्तावेजों और आर्थिक अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
अब सबकी निगाहें जिला परिषद प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।