उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल प्रसिद्ध चिंतपूर्णी मंदिर में 13 अक्टूबर 2026 को माँ चिंतपूर्णी के प्राकृतिक पिंडी स्वरूप के प्रातःकालीन श्रृंगार के आलौकिक दर्शन हुए। श्रद्धालुओं ने माता के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की मंगलकामना की।
नवरात्रों के पावन अवसर पर माँ भगवती के मंदिरों में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिल रही है। इन दिनों भक्तजन माता रानी की आराधना कर परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और जीवन में सकारात्मकता की कामना कर रहे हैं।
पंडित अमित कालिया द्वारा माता चिंतपूर्णी के प्रातःकालीन श्रृंगार के दर्शन करवाए गए। इस अवसर पर भक्तों ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ माता के चरणों में शीश नवाया और माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया।
माँ चिंतपूर्णी को भक्तवत्सल एवं भक्तों की चिंताओं को हरने वाली माता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। नवरात्रों में माँ भगवती की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर भक्तों ने प्रार्थना की कि माँ चिंतपूर्णी की कृपा सभी पर सदैव बनी रहे और हर परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास हो।
“चरण आपके छू रहा हूं, चिंतपूर्णी मात।
चरणामृत दे दीजिए, हो जग में विख्यात॥”