₹15 करोड़ के विकास कार्यों का दावा, 71 निर्माणों के सर्वे का ब्योरा और पार्किंग की चुनौती—‘मसूरी संवाद’ में सहायक अभियंता अजय मलिक ने रखी विभाग की स्थिति
मसूरी | 13 अक्टूबर 2026
होमस्टे पर जारी नोटिस, पार्किंग की कमी, पुश्तैनी मकानों के निर्माण और मास्टर प्लान की अनिश्चितता—मसूरी के विकास से जुड़े इन सवालों पर मसूरी प्रेस क्लब के चौथे ‘मसूरी संवाद’ में MDDA के सहायक अभियंता अजय मलिक ने विभाग का पक्ष रखा। चर्चा में विकास कार्यों, वन संबंधी अनुमतियों, निर्माण सुरक्षा और स्थानीय लोगों के लिए आवास की संभावनाओं पर भी बात हुई।
होमस्टे नोटिस: कार्रवाई से पहले सुनवाई
मलिक ने बताया कि एक दिन के सर्वेक्षण में 71 निर्माणों की जाँच की गई। इनमें 51 मामलों में पहले से कार्रवाई विचाराधीन थी, जबकि 20 मामलों में मौके पर स्वीकृत नक्शे प्रस्तुत नहीं किए जा सके और नोटिस जारी किए गए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस का अर्थ तत्काल सीलिंग या अंतिम दंडात्मक कार्रवाई नहीं है। संबंधित पक्ष दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है और सुनवाई के बाद लागू नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाता है। आवश्यक स्वीकृति के बिना आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधि की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई संभव है।
होमस्टे के संबंध में उन्होंने संचालक के परिवार सहित उसी मकान में रहने और भोजन व्यवस्था से जुड़ी कुछ शर्तों का उल्लेख किया। उन्होंने MDDA के नियोजन नियमों और सरकार की पर्यटन एवं रोजगार से संबंधित होमस्टे व्यवस्था के बीच समन्वय की आवश्यकता भी बताई।
यह सर्वेक्षण एक दिन का विवरण है, पूरे अभियान का कुल आँकड़ा नहीं। मौके पर नक्शा प्रस्तुत न कर पाना अपने आप में अवैध निर्माण का अंतिम प्रमाण नहीं है। संचालकों को दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए और विभाग को सुनवाई की प्रक्रिया पारदर्शी रखनी चाहिए।
करीब ₹15 करोड़ के विकास कार्य
मलिक के अनुसार, उनकी तैनाती के पिछले लगभग 10–11 महीनों में संबंधित क्षेत्रों में करीब ₹15 करोड़ के विकास कार्य हुए हैं। उन्होंने बताया कि MDDA का कार्यक्षेत्र केवल माल रोड तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें 13 राजस्व गाँव भी शामिल हैं।
उन्होंने खट्टा पानी रोड पर लगभग ढाई किलोमीटर की सीसी सड़क, पिक्चर पैलेस से बड़े बैंड और प्रीतम होटल से ITBP गेट तक रेलिंग, भद्रराज मंदिर में रेलिंग एवं सौंदर्यीकरण तथा बुरांशखंडा में सड़क संबंधी कार्यों का उल्लेख किया। पुश्तों, सड़क के मोड़ों के चौड़ीकरण और सामुदायिक भवनों से जुड़े कार्य भी उनके विवरण में शामिल रहे।
मलिक ने दावा किया कि मसूरी से प्राधिकरण को होने वाली आय की तुलना में यहाँ विकास कार्यों पर अधिक खर्च किया जाता रहा है। इस दावे का आकलन करने के लिए परियोजनावार बजट, वास्तविक व्यय और स्थानीय क्षेत्र से प्राप्त आय का सार्वजनिक विवरण उपयोगी होगा।
पार्किंग: सरकारी योजनाएँ और निजी प्रस्ताव
मलिक ने कहा कि MDDA के पास अपना भूमि बैंक नहीं है, जिससे नई पार्किंग विकसित करना चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने लाइब्रेरी क्षेत्र की पार्किंग, जिसे बाद में पर्यटन विभाग को हस्तांतरित किया गया, MDDA कार्यालय और लंढौर घंटाघर के पास विकसित पार्किंग तथा किंक्रेग का उल्लेख किया।
जीरो पॉइंट पार्किंग के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति लेने में लगभग तीन वर्ष लगने की बात भी उन्होंने कही। उनके अनुसार, करीब छह अन्य पार्किंग प्रस्ताव सामने आए हैं। नगर पालिका की ओर से भी कुछ स्थल प्रस्तावित किए गए हैं और एक निजी प्रस्ताव सरकार के स्तर पर भेजा गया है। 15 अक्टूबर को पार्किंग के संबंध में प्रस्तावित सरकारी बैठक के नतीजे इस दिशा में महत्वपूर्ण होंगे।
निजी पार्किंग प्रस्तावों के संदर्भ में नोटिफाइड और डीनोटिफाइड भूमि का अंतर भी महत्वपूर्ण है। वन संरक्षण कानून से प्रभावित अधिसूचित क्षेत्रों में आवश्यक अनुमति के बिना पार्किंग विकसित करने की स्वीकृति नहीं दी जा सकती। डीनोटिफाइड क्षेत्र में भी अनुमति भूमि की स्थिति, नियोजन नियमों और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।
सार्वजनिक उपयोग की पार्किंग और निजी संपत्ति पर पार्किंग बनाने की अनुमति अलग-अलग विषय हैं। इसलिए सवाल यह भी है कि यदि कोई निजी व्यक्ति या संस्था पार्किंग विकसित करना चाहती है, तो उसे स्पष्ट प्रक्रिया और समयबद्ध निर्णय कैसे मिले। मसूरी में पार्किंग की जरूरत केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और आपातकालीन सेवाओं से भी जुड़ी है।
इको पार्क
मलिक ने इको पार्क का टेंडर पूरा होने की जानकारी देते हुए कहा कि वहाँ औषधीय पौधों और स्थानीय वनस्पतियों से जुड़ी व्यवस्थाएँ विकसित करने की योजना है। उन्होंने अगले दो वर्षों में इसके विकसित होने की उम्मीद जताई। अब इसकी वास्तविक प्रगति और समयसीमा पर नजर रहेगी।
पुराने मकान, वन कानून और निर्माण सुरक्षा
मलिक ने वर्ष 2016 के शासनादेश का उल्लेख करते हुए अपने वक्तव्य में नगर पालिका सीमा के भीतर 100 वर्ग मीटर और बाहर के क्षेत्रों में 120 से 150 वर्ग मीटर तक सीमित आवासीय निर्माण की व्यवस्था बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे सामान्य व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं माना जाना चाहिए। किसी भूखंड पर लागू नियमों की पुष्टि संबंधित आदेश और भूमि की स्थिति के अनुसार आवश्यक है।
उनके अनुसार, पिछले तीन वर्षों में लगभग 300–350 आवासीय नक्शे स्वीकृत किए गए और मसूरी में करीब 218 अधिसूचित एस्टेट हैं। वन संरक्षण कानून से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक अनुमति के बिना नक्शा स्वीकृत नहीं किया जा सकता।
वर्ष 1980 से पुराने निर्माणों के प्लिंथ प्रमाणपत्रों के संदर्भ में उन्होंने नगर पालिका के रिकॉर्ड और वन विभाग की भूमिका बताई। लंढौर के लिए वर्ष 2013 के विशेष शासनादेश का भी उल्लेख किया। ढलान की स्थिरता, मिट्टी की जाँच, भूवैज्ञानिक सुरक्षा और कुछ मामलों में खनन विभाग की अनापत्ति भी महत्वपूर्ण हो सकती है। मलिक ने सामान्य ऊँचाई सीमा के संदर्भ में लगभग 11 मीटर का उल्लेख किया, जिसका अनुप्रयोग संबंधित नियमों के अनुसार सत्यापित होना चाहिए।
पुराने मकानों के मालिकों के लिए मरम्मत, कम्पाउंडिंग और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट से जुड़ी स्पष्ट प्रक्रिया तथा समयबद्ध निस्तारण भी जरूरी है।
मास्टर प्लान और स्थानीय आवास
मलिक ने बताया कि सर्वे ऑफ इंडिया, वन विभाग, नगर पालिका और MDDA के सहयोग से पिछले तीन-चार वर्षों से अधिसूचित तथा गैर-अधिसूचित क्षेत्रों की पहचान के लिए सर्वेक्षण चल रहा है। उनके अनुसार, क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट होने के बाद मास्टर प्लान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सर्वेक्षण की प्रगति और अगली समयसीमा सार्वजनिक होने से नागरिकों की अनिश्चितता कम हो सकती है।
स्थानीय आवास पर मलिक ने कहा कि यदि MDDA को नगर पालिका या किसी अन्य विभाग से जमीन मिलती है, तो स्थानीय निवासियों के लिए फ्लैट या किफायती आवास की संभावना पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल यह एक संभावना है, स्वीकृत परियोजना नहीं।
- निष्पक्ष कार्रवाई: कानून सबके लिए समान हो
संवाद के समापन पर मसूरी प्रेस क्लब अध्यक्ष ने उस जनधारणा को सामने रखा कि छोटे निर्माणों, दुकानों या टिन शेड पर शीघ्र कार्रवाई होती दिखाई देती है, जबकि बड़े निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर सवाल उठते हैं। यह चिंता निष्पक्षता और पारदर्शिता की जरूरत रेखांकित करती है, हालाँकि अपने आप में किसी मामले में पक्षपात का प्रमाण नहीं है।
मलिक ने कहा कि लागू नगर नियोजन कानून के तहत MDDA निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई कर सकता है तथा आवश्यक मामलों में पुलिस को पत्र भेज सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण के पास पुलिस जैसी शक्तियाँ नहीं हैं और कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होती है।
अब संवाद की सफलता इस बात से तय होगी कि पार्किंग प्रस्ताव कितने आगे बढ़ते हैं, विकास कार्यों का विवरण कितना पारदर्शी होता है, पुराने मकानों की समस्याओं का समाधान कैसे निकलता है और नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से कैसे सुनिश्चित किया जाता है।
मसूरी को विकास चाहिए—लेकिन ऐसा विकास, जिसमें स्थानीय लोग अपने ही शहर में अजनबी न बनें; पर्यटन रोजगार दे, पर सार्वजनिक सुविधाओं पर असहनीय बोझ न डाले; और निर्माण आगे बढ़े, लेकिन पहाड़ की प्राकृतिक सीमाओं की अनदेखी न हो।
क्योंकि पहाड़ को बचाने का अर्थ केवल उसकी ढलानों और जंगलों को बचाना नहीं, बल्कि उन लोगों के घर, आजीविका और भरोसे को बचाना भी है, जिनसे पहाड़ की पहचान बनती है।