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जूही परमपुरवा में सड़क पर कथित अवैध कब्जे का आरोप, नगर निगम जोन-5 की कार्यशैली पर उठे सवाल
हाश्मी हॉस्पिटल के पास सड़क पर चबूतरे बनाने काw आरोप, निर्माण की जांच और कार्रवाई की मांग
कानपुर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच कानपुर के जूही परमपुरवा क्षेत्र में सड़क पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम जोन-5 की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, जूही परमपुरवा स्थित हाश्मी हॉस्पिटल के पास मकान संख्या 83/145 एच-1 से 83/184 तक सड़क पर कथित तौर पर चबूतरे बनाए जाने का आरोप है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियाज अहमद पुत्र स्वर्गीय हाजी इब्राहिम के मकान के बाहर तक सड़क पर चबूतरों का निर्माण कराया गया है।
इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने आसिफ कुरैशी और आरिफ कुरैशी पर भवन निर्माण के लिए आवश्यक मानचित्र स्वीकृत कराए बिना निर्माण कराने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
नगर निगम जोन-5 की कार्रवाई पर सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मामले को लेकर नगर निगम जोन-5 के संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में शिकायत पहुंचने और विवाद की स्थिति बनने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद कथित अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क या सरकारी भूमि पर नियमों के विरुद्ध कब्जा किया गया है, तो संबंधित विभाग को स्थल का निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि कथित अवैध निर्माण के मामले में अब तक क्या जांच की गई और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कदम उठाए हैं।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
अब सवाल यह है कि नगर निगम जोन-5 और कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या संबंधित स्थल की जांच कर सड़क की वास्तविक स्थिति और निर्माण की वैधता का पता लगाया जाएगा? क्या सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पाए जाने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई होगी?
स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सड़क पर कथित अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करने की मांग की है।
नोट: इस मामले में संबंधित व्यक्तियों और विभाग का पक्ष तथा आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट: rahul diwvedi | कानपुर