सकीट (एटा)। सकीट थाना क्षेत्र में करीब 18 साल पहले हुए हत्याकांड में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष ईसी एक्ट न्यायालय ने दोषी रामौतार उर्फ वदन सिंह पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। 15 अक्टूबर 2026 को आए इस फैसले में पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी अहम रही।
अभियोजन के अनुसार, 11 अप्रैल 2008 को एक व्यक्ति ने थाना सकीट में अपने पुत्र की हत्या की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसके पुत्र की गला दबाकर हत्या करने के बाद शव गेहूं के खेत में छिपा दिया गया। पुलिस ने मामले में मुकदमा अपराध संख्या 33/2008 दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत विवेचना शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और बक्शीपुर खास निवासी रामौतार उर्फ वदन सिंह पुत्र मूलचंद के खिलाफ 5 अगस्त 2008 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई।
विशेष लोक अभियोजक (ईसी एक्ट) विजेंद्र पाल सिंह के मुताबिक, 10 अप्रैल 2008 को रुक्म सिंह को आरोपी शादी समारोह में दावत के बहाने अपने साथ ले गया था। 12 अप्रैल की शाम उसका शव खेत में मिला। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देशन में मामले की लगातार निगरानी की गई। पुलिस मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की पैरवी के बाद न्यायालय ने रामौतार उर्फ वदन सिंह को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।