हरदोई। आईडीबीआई बैंक में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हिस्सेदारी विदेशी निजी निवेशक को बेचने के प्रस्ताव के विरोध में शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को हरदोई में बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने काली पट्टी बाँधकर प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) की हरदोई इकाई के आह्वान पर आयोजित इस विरोध अभियान में बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार के निर्णय को जनहित और सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।
यूएफबीयू के अनुसार, आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की लगभग 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बैंक में आम जनता की करीब 3.50 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है। संगठन ने यह भी दावा किया कि बैंक ने पिछले तीन वर्षों में कुल 22,600 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। ऐसे में लाभ अर्जित करने वाले बैंक की हिस्सेदारी विदेशी निजी निवेशक फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड को बेचने के औचित्य पर यूनियन ने सवाल उठाए।
संसद में दिए गए आश्वासन का मुद्दा उठाया
बैंक यूनियन ने कहा कि वर्ष 2003 में आईडीबीआई के बैंकिंग कंपनी में रूपांतरण के दौरान संसद में सरकार की ओर से अपनी हिस्सेदारी कम-से-कम 51 प्रतिशत बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। यूएफबीयू का कहना है कि वर्तमान निर्णय उस आश्वासन के विपरीत है। संगठन ने निजीकरण के बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और पूर्व सैनिकों के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई।
आत्मनिर्भर भारत की नीति पर उठाए सवाल
यूएफबीयू ने केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत की नीति और एक महत्वपूर्ण बैंक में विदेशी निजी निवेशक की हिस्सेदारी बढ़ाने के निर्णय को विरोधाभासी बताया। संगठन के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आम नागरिकों की बचत सुरक्षित रखने, आर्थिक विकास को गति देने और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए बैंकों को केवल लाभ-हानि के व्यावसायिक नजरिये से देखना उचित नहीं है।
फैसला वापस लेने की माँग
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने सरकार से आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बेचने के निर्णय को वापस लेने की माँग की। काली पट्टी बाँधकर किए गए इस विरोध प्रदर्शन को बैंककर्मियों ने अपनी एकजुटता और सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था की रक्षा के संकल्प का प्रतीक बताया।
यूएफबीयू ने स्पष्ट किया कि आगे के घटनाक्रम और परिस्थितियों को देखते हुए आंदोलन के अगले कार्यक्रम तय किए जाएँगे।