मोरड़ा, 27 अक्टूबर: मयूरभंज जिले के मोरड़ा ब्लॉक अंतर्गत चित्रड़ा अधिसूचित क्षेत्र परिषद (एनएसी) में दो विकास परियोजनाओं के निर्माण कार्य में अनियमितता और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप सामने आया है। इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। सोमवार को ग्रामीणों ने मोरड़ा के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अनाकार नायक के माध्यम से मयूरभंज जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार, चित्रड़ा एनएसी में धंगराबिला पीडब्ल्यूडी सड़क से काजल सोरेन के घर तक बनने वाली कंक्रीट सड़क के निर्माण में सरकारी प्राक्कलन और निर्धारित निर्माण मानकों की अनदेखी की गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत तीन लाख रुपये बताई गई है। शिकायत में कहा गया है कि पंचायती राज विभाग की ओर से एक जूनियर इंजीनियर के नाम पर कार्यादेश जारी किया गया था।ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। शिकायत के मुताबिक, निर्माण कार्य में निर्धारित कटिंग, दो इंच बालू, चार इंच मेटल कंक्रीट और चार इंच चिप्स कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाना था। लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्य में इन निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया।इसके अलावा, ग्रामीणों ने घटिया सीमेंट और स्टोन चिप्स के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मिट्टी मिली बालू से कंक्रीट तैयार किया गया, जिससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इस तरह के निर्माण से सरकारी धन का दुरुपयोग हो सकता है।वहीं, दूसरी शिकायत में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी एमपीएलएडीएस के तहत बनाए गए विश्राम शेड के निर्माण पर सवाल उठाए गए हैं। इस परियोजना का क्रियान्वयन मोरड़ा पंचायत समिति द्वारा किया गया था और इसकी अनुमानित लागत भी तीन लाख रुपये बताई गई है।शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सूचना पट्ट पर जिस स्थान का उल्लेख किया गया था, वहां विश्राम शेड का निर्माण नहीं किया गया। आरोप है कि इसके बजाय राजाबांध के पास चरागाह भूमि पर शेड बना दिया गया, जबकि इसके लिए आवश्यक अनुमति या भूमि स्वीकृति आदेश नहीं लिया गया था।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विश्राम शेड के निर्माण में स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार ग्रेड बीम और कॉलम का निर्माण नहीं किया गया। इसके साथ ही मेटल कंक्रीट बेस, कॉलम की नींव तथा निर्माण में जंग लगे लोहे के सरियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।दोनों निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को गंभीर बताते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निर्माण सामग्री की प्रयोगशाला में जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर स्थलीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जांच में यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।ग्रामीणों ने अपनी शिकायत मोरड़ा बीडीओ अनाकार नायक के माध्यम से जिला कलेक्टर तक पहुंचाई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक संबंधित विभागों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है या नहीं, इसकी भी पुष्टि नहीं हो सकी है फिलहाल, निर्माण कार्यों में गड़बड़ी से जुड़े ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज की रिपोर्ट।
