सारसकणा, 27 अक्टूबर 2026: मुंडारी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और ओडिशा की दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर मंगलवार को मयूरभंज जिले के सारसकणा ब्लॉक में विशाल जनसमूह और रैली का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में मुंडारी भाषी महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और अपनी भाषा को संवैधानिक पहचान दिलाने की मांग उठाई।
कार्यक्रम के दौरान सारसकणा ब्लॉक के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के माध्यम से ओडिशा के मुख्यमंत्री, भारत के प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा गया। मांगपत्र में मुंडारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा ओडिशा की दूसरी राजभाषा के रूप में मान्यता देने की मांग की गई।
मुंडारी भाषा को संवैधानिक पहचान देने की मांग
मुंडारी भारत की प्राचीन आदिवासी भाषाओं में से एक है। भगवान बिरसा मुंडा इसी भाषाई समुदाय से संबंधित थे। भारत सरकार उनके जन्मदिवस 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाती है।
वहीं, संविधान सभा के सदस्य जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान निर्माण और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था। वे भी मुंडा समुदाय से संबंधित थे।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में लगभग 16 लाख लोगों ने मुंडारी को अपनी भाषा के रूप में दर्ज कराया था। हालांकि, आंदोलनकारियों का दावा है कि वर्तमान में मुंडारी भाषियों की संख्या 50 लाख से अधिक है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा को अब तक संवैधानिक मान्यता नहीं मिलना चिंता का विषय है।
इसी को लेकर मुंडारी भाषा समन्वय समिति और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने भाषा के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और संवैधानिक अधिकारों के लिए अपनी मांग तेज की है।
17 पंचायतों से पहुंचे हजारों लोग
मांगों के समर्थन में सारसकणा हाट मैदान से ब्लॉक कार्यालय तक विशाल रैली निकाली गई। इसमें सारसकणा ब्लॉक की सभी 17 ग्राम पंचायतों से 10 हजार से अधिक मुंडारी भाषी महिला और पुरुषों के शामिल होने की जानकारी आयोजकों की ओर से दी गई।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रदर्शनकारियों ने दो कतारों में अनुशासित तरीके से पदयात्रा की। रैली के दौरान मुंडारी संस्कृति के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर आकर्षक लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए गए। पूरे आयोजन में भाषा, संस्कृति और सामुदायिक एकता का संदेश देखने को मिला।
जमीन के रिकॉर्ड में जाति का नाम सुधारने की भी मांग
इस कार्यक्रम के दौरान मुंडा समुदाय की जमीन से संबंधित एक अन्य मुद्दा भी उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि समुदाय के कुछ लोगों के जमीन के पट्टों और रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) में जाति का नाम ‘मुंडा’ के स्थान पर ‘भूमिज’ दर्ज किया गया है।
इस मामले की जांच करने और आवश्यक सुधार करने की मांग को लेकर सारसकणा तहसीलदार को अलग से मांगपत्र सौंपा गया।
कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
रैली में शंखाभंगा ग्राम पंचायत के सरपंच बाबाजी सिंह, झारपोखरिया ग्राम पंचायत की सरपंच मालती सिंह, बड़साही ब्लॉक के जिला परिषद सदस्य दशरथ सिंह और श्यामाखुंटा ब्लॉक के जिला परिषद सदस्य मधुसूदन सिंह शामिल हुए।
इसके अलावा मुंडारी भाषा समन्वय समिति के केंद्रीय महासचिव इंजीनियर सुनाराम सिंह, पर्यवेक्षक रामेश्वर सिंह एवं अजीत कुमार सिंह, मुंडारी शिक्षा परिषद के सचिव बुधिया सिंह, बड़साही ब्लॉक संयोजक बैद्यनाथ सिंह, बांसबिला पंचायत संयोजक सुनाराम सिंह और उमेश चंद्र सिंह उपस्थित थे।
भारत मुंडा समाज, ओडिशा राज्य शाखा के अध्यक्ष रवींद्रनाथ सिंह, ओडिशा मुंडारी छात्र संगठन के अध्यक्ष मंगल सिंह, मुंडा युवा संगठन के अध्यक्ष धर्मपद सिंह तथा मुंडा स्वशासन गुटुगाम के अध्यक्ष मनोरंजन सिंह सहित अनेक सामाजिक एवं सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
स्थानीय आयोजकों ने संभाली कार्यक्रम की जिम्मेदारी
कार्यक्रम का नेतृत्व मुंडारी भाषा समन्वय समिति, सारसकणा ब्लॉक के संयोजक करमचंद सिंह, सक्रिय सदस्य पंडित सिंह और बिरंचि सिंह ने किया। इसके साथ ही ब्लॉक क्षेत्र में संचालित विभिन्न मुंडारी भाषा विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भाषा और सांस्कृतिक अधिकारों के लिए एकजुटता
सारसकणा में आयोजित इस विशाल जनसमागम के माध्यम से मुंडारी भाषी समुदाय ने अपनी भाषा को संवैधानिक पहचान दिलाने, ओडिशा में दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त करने और जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने की मांग दोहराई।
आयोजकों के अनुसार, यह जनसमागम मुंडारी भाषा के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।
