खूँटा, 28 अक्टूबर। मुंडारी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा ओडिशा की द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर मुंडारी भाषा समन्वय समिति की ओर से जनआंदोलन तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में खूँटा और गोपबंधुनगर ब्लॉक में विशाल जनसभा एवं रैली का आयोजन किया गया। भारी बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में मुंडारी भाषी लोग इसमें शामिल हुए और अपनी मातृभाषा के अधिकार तथा सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की मांग उठाई।
आयोजकों के अनुसार, रैली खूँटा बंगला चौक से शुरू होकर खूँटा एवं गोपबंधुनगर ब्लॉक कार्यालय तक निकाली गई। दावा किया गया कि दोनों ब्लॉकों से लगभग 10 हजार से अधिक महिला-पुरुष इस रैली में शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, मुंडारी संस्कृति के पारंपरिक वाद्ययंत्रों और नृत्य ने रैली को आकर्षक बनाया। बारिश की परवाह किए बिना प्रदर्शनकारियों ने अनुशासित ढंग से पदयात्रा करते हुए अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।
संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि मुंडारी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए और इसे ओडिशा की द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया जाए। इस संबंध में खूँटा एवं गोपबंधुनगर ब्लॉक के प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) के माध्यम से ओडिशा के मुख्यमंत्री, भारत के प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
भाषा प्रेमियों का कहना है कि मुंडारी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मुंडा समाज के इतिहास, परंपरा, लोकज्ञान और सांस्कृतिक अस्मिता का महत्वपूर्ण आधार है। भाषा का संरक्षण और प्रचार-प्रसार होने से आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और परंपराओं से जुड़ी रह सकेंगी।
15 सामाजिक संगठनों के सहयोग से आंदोलन
मुंडारी भाषी समाज के भाषाई अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के उद्देश्य से गठित मुंडारी भाषा समन्वय समिति इस आंदोलन को गांव से लेकर ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर तक व्यापक बनाने का प्रयास कर रही है।
मुंडा समाज के 15 सामाजिक संगठनों के सहयोग से गठित यह मंच जनसभाओं, रैलियों, ज्ञापन सौंपने और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से भाषा को मान्यता दिलाने के लिए जनसमर्थन जुटा रहा है।
इस दौरान आदिवासी अस्मिता और अधिकारों के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष तथा संविधान सभा में आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले जयपाल सिंह मुंडा के योगदान को भी याद किया गया। आंदोलनकारियों ने भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया।
कई सामाजिक प्रतिनिधि और भाषा प्रेमी हुए शामिल
कार्यक्रम में मुंडारी शिक्षा परिषद के सचिव बुधिया सिंह, मुंडारी भाषा समन्वय समिति के पर्यवेक्षक रामेश्वर सिंह, बांसबिला पंचायत के संयोजक सुनाराम सिंह, गुंडिहुड़ी पंचायत के संयोजक उमेश चंद्र सिंह, बड़साही ब्लॉक के संयोजक बैद्यनाथ सिंह, बेतनटी ब्लॉक के संयोजक तपन सिंह, जिला परिषद सदस्य दशरथ सिंह एवं मधुसूदन सिंह तथा भारत मुंडा समाज, ओडिशा प्रदेश के अध्यक्ष रवींद्रनाथ सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और भाषा प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में खूँटा ब्लॉक के संयोजक रांगा सिंह, सेवानिवृत्त सैनिक प्रधान सिंह, लेम्बुधर सिंह, गोपबंधुनगर ब्लॉक के सचिव एवं मुंडारी भाषा परीक्षा नियंत्रक भगवान सिंह, महिला सचिव बसंती सिंह, विभिन्न मुंडारी भाषा विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं और सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
### मान्यता मिलने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प
जनसभा के माध्यम से समिति ने स्पष्ट किया कि मुंडारी भाषा को संवैधानिक मान्यता और राज्य स्तर पर द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिलने तक आंदोलन को व्यापक बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।
मुंडारी भाषा की मान्यता की मांग अब केवल भाषा के संरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान, सांस्कृतिक विरासत और अधिकारों से जुड़ा व्यापक जनआंदोलन बनती जा रही है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।
