साहित्य ही संस्कृति की आत्मा है: बख्तियारपुर में समारोहपूर्वक मनाई गई साहित्यकार तृप्ति नारायण शर्मा ‘तृप्त’ की जयंती
बख्तियारपुर, 1 नवंबर:
संभावना साहित्य मंच, बख्तियारपुर के तत्वावधान में रविवार को स्थानीय ग्लोबल मैथमेटिक्स सेंटर (रेलवे गुमटी के निकट, नंदन पैलेस के बगल में) के प्रांगण में एक भव्य जयंती समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन मंच के संस्थापक अध्यक्ष, जाने-माने कविवर, साहित्यकार, नाटककार, उपन्यासकार एवं आदर्श मध्य विद्यालय बख्तियारपुर के पूर्व प्रधानाध्यापक स्मृति शेष तृप्ति नारायण शर्मा ‘तृप्त’ की स्मृति को समर्पित रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रात: 11:00 बजे हुई और यह शाम 5:00 बजे तक उत्साहपूर्ण माहौल में संचालित हुआ। इस दौरान ‘साहित्य ही संस्कृति की आत्मा है’ विषय पर विचार-विमर्श के साथ-साथ शानदार काव्य पाठ का भी आयोजन किया गया।
साहित्य और शिक्षा जगत में योगदान को किया गया नमन
समारोह में संभावना साहित्य मंच के सभी सम्मानित कविगणों, सदस्यगणों और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने बड़ी संख्या में शिरकत कर स्मृति शेष तृप्ति नारायण शर्मा ‘तृप्त’ के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में न केवल शिक्षा के प्रसार में अहम भूमिका निभाई, बल्कि अपने उपन्यासों, नाटकों और कविताओं के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दी। मंच के संस्थागत विकास में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
काव्य पाठ से गूंजा प्रांगण, श्रोता हुए मंत्रमुग्ध
समारोह के दूसरे सत्र में आयोजित काव्य पाठ ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। मंच पर उपस्थित प्रबुद्ध कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कविताओं में जहाँ एक ओर सामाजिक संवेदना और मानवीय मूल्यों की गहरी छाप देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर स्थानीय संस्कृति और माटी की महक भी मुखर हुई।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने संकल्प लिया कि स्मृति शेष तृप्ति नारायण शर्मा ‘तृप्त’ के साहित्यिक विचारों और आदर्शों को आगे भी पूरी ऊर्जा के साथ जीवंत रखा जाएगा। इस आयोजन ने बख्तियारपुर के साहित्यिक गलियारों में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है।
