कुछ पैसों की बचत की लालच में अमृत सरोवर की योजना को कर दिया धरासाही
मंडल ब्यूरो चीफ चंद्रजीत सिंह की रिपोर्ट
सोनभद्र विकासखंड चतरा में बहुत से काम विकास के नाम पर कराए जा रहे हैं लेकिन विकास के नाम पर जमकर लूट की बानगी भी चतरा ब्लॉक बना हुआ है। ब्लॉक परिसर में जहां शौचालय और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है उसी ब्लाक में अमृत सरोवर का निर्माण ग्राम प्रधान द्वारा कराया गया है जिसमें जमकर भ्रष्टाचार देखने को मिला मौके पर जब ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंच गया तो देखने को मिला 2023-2024 में हुए अमृत सरोवर के निर्माण में जमकर मानकों की धज्जियां उड़ाई गई है अमृतसरोवर के लिए जो मानक रहे हैं उसे मानक को पूरा करने पर संबंधित ठेकेदार ने कोताही भर्ती है और कुछ पैसों की बचत की लालच में अमृत सरोवर की योजना को धरसही कर दिया है। जिगजॉग इट्ट की जगह सिंपल राख वाली इट्टों का प्रयोग किया गया है और भस्सी की जोड़ाई का उपयोग किया गया है जिस वजह से जगह-जगह इंटरलॉकिंग बैठ गई है। कारण पता किया गया तो बताया गया कि मिट्टी दबाई नहीं गई थी और घटिया इट्टों की वजह से इंटरलॉकिंग बैठ गई। अमृत सरोवर में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए जो वाल बनाया गया है वो सुरक्षित नहीं है क्योंकि कटीली तारों से बाउंड्री की घेरेबंदी नहीं कि गई है। जिस वजह से मवेशियों सहित छोटे बच्चों के सरोवर में गिरने का खतरा बना रहता है। ब्लॉक के संबंधित अधिकारियों से सब अमृत सरोवर निर्माण में घटिया सामग्री की बाबत पूछा गया तो उन्होंने ऑन कैमरा कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बातों बातों में उन्होंने इतना बताया कि घटिया सामग्री का प्रयोग हुआ है इससे इनकार नहीं किया जा सकता अमृत सरोवर के नक्शे में भी कमियां है जिस वजह से बरसात में सरोवर के चारों तरफ बरसात का पानी ओवर फ्लो होकर बहता है। फिलहाल सरोवर का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। हालांकि तकनीकी टीम से जांच कराने की बात कहकर मामले से फिलहाल पल्ला झाड़ लिया गया। अब देखने वाली बात होगी कि अमृत सरोवर का भुगतान बिना रिपेरिंग किये होता है कि नहीं। सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं का पलीता लगाना अधिकारी कब छोड़ेंगे कब अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वाहन करेंगे आज भी बड़ा सवाल है।