मोतीलाल डा. टीकमाजी घांची कोसेलाव द्वारा गांव के निवासी मोहनलाल ताराजी माली, दिवाली बाई W% मोहनलाल माली, १ उसकी पूत्री निरमा कुमारी जमाई निरंजन कुमार के कि खिलाफ श्रीमान अतिरिक्त जिला कलेक्ट्रेट महोदय बाली पाली में एक निगरानी पेश करके दावा पेश किया कि गांव के मोहनलाल ताराजी माली द्वारा ग्राम पंचायत कोसेलाव से गांव के खसरा नम्बर 1139 जो कि ग्राम पंचायत कोसेलाव की आबादी मे नही है उसमें कुल पांच पढे पुशतेनी बनवाये जिसका कूल नापतौल 11550 स्कोर फीट मे है वो जमीन सरकारी है उनके जमीन हडपने की नियत से अलग-अलग पांच पट्टे बनवाये जिनमें मोहनलाल ताराजी के नाम एक पट्टा व दिवाली बाई के नाम से एक पट्टा व उसकी पूत्री निरमा कुमारी के नाम से दो पढे व उनके जमाई निरंजन कुमार के नाम से एक पट्टा कूल 5 पट्टे बनवाये जिसमें चार पट्टे संरपच सोनी देवी द्वारा व एक पढा निरमा गहलोत के नाम से पूर्व संरपच नारायणसिहजी के द्वारा बनवाये गये प्राथी मोतीलाल का कहना है कि सन २००२ में संरपच शांति देवी द्वारा खसरा न: 1139 में मोहनलाल ताराजी माली के बाडा का अतिक्रमण मानकर नोटीस देकर कब्जा हटाने की कार्यवाही की थी तो मोहनलाल ताराजी माली ने विकास अधिकारी महोदय सुमेरपुर के समक्ष पेश होकर गुहार लगाई कि मेरा वाड़ा 125X65-8125 स्कोर फीट में कब्ज़ा सुदा है। जिनमे संरपच शांति देवी द्वारा इसका अतिक्रण को हटाया जा रहा है इसलिए आप मुझे पट्टा बनाने का आदेश करावे इससे स्पष्ट होता है कि प्रार्थी मोहनलाल ताराजी माली सन् २००१ में स्यम का 8125 स्कोर फीट का कब्जा बता रहा है लेकिन अब मोहनलाल ताराजी माली द्वारा 2019 से 2023 तक में पांच पढा बनाकर 11550 स्कोर फीट फीट होना बताया जिसने खुली गडबड सामने आती है कि सन् २००२ में 8125 स्कोर फीट का कब्जा था और अब 11550 में पट्टे बनाये जिसमे २०.२२जाल में 3425 स्कोर फीट जमीन पर ओर अतिक्रमण किया इसके मोतीलाल का कहना है कि निरमा व जमाई निरंजन कुमार मूल निवासी खुडाला के निवासी है फिर भी कोसेलाव ग्राम की सरकारी जमीन पर उनके नाम से पुश्तैनी पट्टे बनवायें जितने स्पष्ट साबित होता है कि यह पट्टे फर्जीवाडे मे बनवाये इस तरह के कई तरह के सबूतों के आधार पर प्रार्थी मोतीलाल टीकमारामजी घांची द्वारा मोहनलाल ताराजी माली के व अन्य चार पट्टा धारक के ऊपर फर्जी पढे बनाने का सबुत के साथ श्रीमान अतिरिक्त कलेक्टर महोदय कार्यलय में दावा निगरानी पेश करके पट्टा खारिज करवाने व कानूनी कार्यवाही करने का दावा लगाया था आज भी न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है