तात्कालिक फायदे के लोगों की जिंदगी से खिलवाड़..
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान,
कितना बदल गया इंसान..कितना बदल गया इंसान,
सूरज ना बदला,चाँद ना बदला,ना बदला रे आसमान,
कितना बदल गया इंसान..कितना बदल गया इंसान।आज लालच में आकर लोगों की जिंदगी से खेल रहा इंसान,कितना बदल गया इंसान।बरसों से हमारे देश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट पर सवाल उठ रहे हैं! बाजार में मिलने वाली कोई भी सब्जी हो, सभी में रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं ताकि सब्जी ताजा लगे। फसल ज्यादा हो इसके लिए भी किसान रासायनिक पदार्थों का प्रयोग करते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। घी, दूध, पनीर और मावा आदि जिनसे त्योहारों पर मिठाइयां बनती हैं, सभी में मिलावट पाई जाती है। मसालों में भी मिलावट हो रही है जिनका हम प्रतिदिन रसोई में इस्तेमाल करते हैं, चाहे वह काली मिर्च हो, जीरा हो या हल्दी हो। सभी में मिलावट पाई जाती है।यहां तक कि बाजारों या चौराहों पर मिलने वाली पानी की बोतलें भी कई बार नकली मिलती है। खेती-बाड़ी में हानिकारक रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल से मनुष्य के स्वास्थ्य पर तो असर होता ही है,खेती की जमीन भी बंजर हो जाती है,लेकिन किसान अपने तात्कालिक फायदे के लिए ही सोचता है, मनुष्य के स्वास्थ्य या जमीन की उसे परवाह नहीं। सवाल यह उठता है कि ऐसे में इंसान खाए तो क्या खाए! किस चीज पर विश्वास करें!संभव नहीं कि इन खाद्य पदार्थों की पहले कहीं जांच कराएं, फिर इन्हें खाएं।
रिपोर्ट रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़