दतिया के आधार केंद्र बने हैं अवैध वसूली के अड्डे, आम जनता को लूटा जा रहा है खुलेआम।
नंबर-2 “नियमों की धज्जियां उड़ाते संचालक!”
UIDAI द्वारा तय ₹50 के संशोधन कार्य के लिए वसूले जा रहे ₹200 से ₹400 तक।
नंबर-3 “सूची गायब, लूट जारी!”
शुल्क चार्ट केंद्रों पर नदारद — लोगों को नहीं पता कि कितना शुल्क निर्धारित है।
नंबर-4 “प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में!”
कलेक्टर ऑफिस के पास होते हुए भी कार्रवाई से दूरी क्यों?
नंबर-5 “कौन दे रहा है शह?”
सवाल उठता है — क्या किसी की मिलीभगत से संचालक मनमानी पर उतरे हैं?
नंबर-6″बच्चों के आधार में फिंगरप्रिंट अपडेट के नाम पर वसूली!”
मासूमों के अधिकारों का हो रहा है शोषण, कहीं 150 तो कहीं 350 की वसूली।
नंबर-7 “जनता की जेब पर डाका, शिकायतों पर सन्नाटा!”*
अनेकों शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार मौन, आखिर कब होगी सुनवाई?
नंबर-8 “तेज-तर्रार कलेक्टर की चुप्पी क्यों?”
दतिया की जनता पूछ रही है — क्या ये ‘तेजतर्रार प्रशासन’ केवल नाम का है?
नंबर-9 “UIDAI के नियम फाइलों में कैद!”
जमीनी हकीकत उलट — नियम ताक पर, भ्रष्टाचार सर चढ़कर बोल रहा।
नंबर-10 “कब खत्म होगा यह आधार केंद्रों का ‘अधार’?
प्रशासन जवाब दे — कब तक चलता रहेगा ये जनशोषण?”
रिपोर्ट गजेन्द्र सिंह यादव