उरई(जालौन):
आपातकाल दिवस पर लोकतंत्र सेनानियों का हुआ सम्मान:
जालौन में राष्ट्रीय आपातकाल के 50 वर्ष पर आज विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आपातकाल दिवस का भावपूर्ण आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर, लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों और उनके आश्रितों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी, सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संजय कुमार, जिला विकास अधिकारी, लोकतंत्र सेनानी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे। विचार संगोष्ठी के दौरान, आपातकाल के समय जेलों में बंद रहे लोकतंत्र सेनानियों ने अपने संघर्षपूर्ण और कष्टप्रद अनुभवों को साझा किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे 25 जून, 1975 को देश में आपातकाल लागू होते ही प्रेस की स्वतंत्रता पर निर्मम अंकुश लगाया गया, विपक्षी नेताओं को सलाखों के पीछे धकेल दिया गया और आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया। सभी उपस्थित लोगों ने इस काले अध्याय पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए, जिससे उस दौर की पीड़ा और संघर्ष की यादें ताज़ा हो गईं। कार्यक्रम स्थल पर एक हस्ताक्षर अभियान और चित्र प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में आपातकाल के समय की महत्वपूर्ण घटनाओं, तत्कालीन समाचारों, प्रमुख नेताओं की गतिविधियों और जनआंदोलनों को दर्शाया गया था, जिसने लोगों को उस भयावह दौर की वास्तविकता से रूबरू कराया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का एक ऐसा अध्याय है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि उस दौर में जिन लोगों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की, वे वास्तव में हमारे समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने आज के दिन को लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प लेने का अवसर बताया। सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुए कहा कि इससे हमें यह सीख मिलती है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए निरन्तर सजग रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियों के कारण ही आज हम एक स्वतंत्र और मजबूत लोकतंत्र में सांस ले रहे हैं। अन्य जन प्रतिनिधियों ने भी आपातकाल के दौरान अपनी आज़ादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की कीमत पर देश को लोकतांत्रिक रास्ते पर बनाए रखने वाले लोकतंत्र सेनानियों के अतुलनीय योगदान की सराहना की। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के साहस और बलिदान को नमन करते हुए युवाओं से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में, सभी जनप्रतिनिधियों द्वारा लोकतंत्र सेनानियों को फूलमाला पहनाकर अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। इसके उपरांत, आपातकाल दिवस के अवसर पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और लोकतंत्र सेनानियों ने हस्ताक्षर किए, जो लोकतंत्र की रक्षा के प्रति उनके सामूहिक संकल्प को दर्शाता है।
(अनिल कुमार ओझा ब्यूरो प्रमुख
उरई-जालौन) उत्तर प्रदेश